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त्रिपुरा में विलेज कमेटी चुनाव, 4,597 सीटों पर 10,890 उम्मीदवारों ने भरा नामांकन

त्रिपुरा में विलेज कमेटी चुनाव, 4,597 सीटों पर 10,890 उम्मीदवारों ने भरा नामांकन
त्रिपुरा में विलेज कमेटी चुनाव, 4,597 सीटों पर 10,890 उम्मीदवारों ने भरा नामांकन

अगरतला, 10 सितंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा में 10 साल बाद होने जा रहे विलेज कमेटी चुनावों के लिए 4,597 सीटों पर 10,890 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। इनमें बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं भी शामिल हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (टीटीएएडीसी) के तहत आने वाली विलेज कमेटी की 587 कमेटियों की 2,634 सीटों पर 4,597 सीटों के लिए 28 सितंबर को चुनाव होने हैं। ये चुनाव राजनीतिक लिहाज से काफी अहम माने जा रहे हैं। ये ग्राम पंचायतों के बराबर होती हैं, जो टीटीएएडीसी इलाके से बाहर होती हैं।

सत्तारूढ़ भाजपा अपने दो आदिवासी सहयोगी दलों (टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ माकपा के नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस है।

त्रिपुरा राज्य चुनाव आयोग (टीएसईसी) के अधिकारियों ने बताया कि 10,890 उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा 4,361 उम्मीदवार टीएमपी ने उतारे हैं, उसके बाद माकपा के 2,456, भाजपा के 1,971, आईपीएफटी के 483, कांग्रेस के 465 और भाकपा के 4 उम्मीदवार हैं। करीब 1,150 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं।

कुल सीटों में से 1,169 सीटों पर अब तक सिर्फ एक-एक नामांकन आया है, जिससे इन उम्मीदवारों का निर्विरोध जीतना तय माना जा रहा है। तीन सीटों (मुंगियाकामी ब्लॉक के तहत दो और हेजामारा ब्लॉक के तहत एक) पर किसी भी राजनीतिक दल ने नामांकन नहीं किया है। नामांकन वापसी की आखिरी तारीख शुक्रवार, 11 सितंबर है, उसके बाद चुनाव की अंतिम तस्वीर साफ होगी।

चुनाव को लेकर आठों जिलों से कई घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। आईपीएफटी के वरिष्ठ नेता और मंत्री शुक्ला चरण नोआतिया ने कहा कि 8 सितंबर को खोवाई जिले के हेजामारा में उनकी पार्टी के महासचिव स्वपन देबबर्मा पर बेरहमी से हमला किया गया।

शुक्ला चरण नोआतिया ने बयान में कहा, "टीएमपी के समर्थकों ने देबबर्मा को उस समय निशाना बनाकर पीटा जब वह खोवाई गांव जा रहे थे। इस तरह की हिंसा बिल्कुल अस्वीकार्य है। आईपीएफटी, भाजपा और टीएमपी गठबंधन के तौर पर विलेज कमेटी चुनाव एक साथ लड़ रहे हैं। इस तरह की आक्रामकता सीधे तौर पर हमारी एकता की भावना को कमजोर करती है।"

उन्होंने कहा कि राज्य के हर कोने में राजनीतिक हिंसा तुरंत बंद होनी चाहिए। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से शांति बनाए रखने और गठबंधन की अखंडता को बनाए रखने की अपील की।

वहीं माकपा और कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि उनके उम्मीदवार बड़ी संख्या में सीटों पर टीएमपी और भाजपा कार्यकर्ताओं के हमलों, धमकी और बाधा के कारण नामांकन पत्र जमा नहीं कर सके।

लेफ्ट फ्रंट के संयोजक और पूर्व मंत्री माणिक डे ने मीडिया से कहा, "हमने एसईसी से चुनाव सुचारू रूप से कराने के लिए उचित कार्रवाई करने को कहा है, लेकिन आयोग ने अभी तक हिंसा को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।"

28 सितंबर को होने वाले विलेज कमेटी चुनावों से पहले 4 सितंबर को नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई थी। यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुई थी। इसमें गृह मंत्री शाह और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा के अलावा भाजपा के नॉर्थईस्ट प्रभारी संबित पात्रा और टीएमपी प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा भी मौजूद थे।

4 सितंबर को दिल्ली में हुई बैठक के बाद 6 सितंबर को अगरतला के एक होटल में भाजपा और टीएमपी नेताओं के बीच बंद कमरे में बैठक हुई, जहां सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया गया। इस मैराथन बैठक में भाजपा के तीन मंत्री और दो नेता और टीएमपी के एक मंत्री और दो विधायकों सहित पांच नेता शामिल हुए थे।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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