त्रिपुरा सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त डीए-डीआर की घोषणा की
अगरतला, 16 मार्च (आईएएनएस)। त्रिपुरा सरकार ने सोमवार को राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में 5 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी की घोषणा की। इस फैसले से राज्य के कुल 1,83,582 कर्मचारियों और पेंशनरों को लाभ मिलेगा।
विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मुख्यमंत्री मणिक साहा ने सदन को जानकारी दी कि संशोधित डीए और डीआर 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इस घोषणा के बाद सत्तापक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा उस समय की, जब वित्त, योजना एवं समन्वय मंत्री प्राणजीत सिंघा रॉय ने विधानसभा में वर्ष 2026–27 का बजट पेश किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिरिक्त डीए और डीआर लागू करने से राज्य सरकार पर सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
इस बीच विपक्षी सदस्यों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री सुदीप रॉय बर्मन तथा विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी (सीपीआई-एम) ने कहा कि डीए-डीआर बढ़ोतरी की घोषणा वित्त मंत्री के बजट प्रस्तावों में शामिल होनी चाहिए थी।
सुदीप रॉय बर्मन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने स्थापित परंपराओं और नियमों का उल्लंघन किया है। वहीं जितेंद्र चौधरी ने राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया डीए-डीआर के बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा।
मुख्यमंत्री सदन में इन सवालों का जवाब देने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अन्य मुद्दों पर हंगामे के कारण वे अपना जवाब पूरा नहीं कर सके। इसके बाद कार्यवाहक अध्यक्ष राम प्रसाद पॉल ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
वित्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, इस फैसले से 1,02,563 सरकारी कर्मचारी और 81,019 पेंशनर लाभान्वित होंगे। अधिकारी ने बताया कि मार्च 2018 में सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने 1 अक्टूबर 2018 से 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वेतनमान में संशोधन किया था।
तब से राज्य सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए कई बार डीए और डीआर में बढ़ोतरी कर चुकी है। हालांकि, राज्य के कर्मचारी और पेंशनर लंबे समय से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर डीए-डीआर की मांग कर रहे हैं।
इस बीच संसदीय कार्य मंत्री रतन लाल नाथ ने बताया कि विधानसभा का बजट सत्र 25 मार्च तक जारी रहेगा। यह इस साल त्रिपुरा विधानसभा की पहली बैठक है।
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