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त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग को अंतिम विदाई, बुधवार को यूपी में होगा अंतिम संस्कार; त्रिपुरा में एक दिन का शोक

त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग को अंतिम विदाई, बुधवार को यूपी में होगा अंतिम संस्कार; त्रिपुरा में एक दिन का शोक
त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग को अंतिम विदाई, बुधवार को यूपी में होगा अंतिम संस्कार; त्रिपुरा में एक दिन का शोक

अगरतला, 21 जुलाई (आईएएनएस)। रहस्यमय परिस्थितियों में मौत का शिकार हुए त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग को मंगलवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनका अंतिम संस्कार बुधवार सुबह उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बरौत स्थित उनके पैतृक गांव में किया जाएगा। इस बीच, त्रिपुरा सरकार ने उनके सम्मान में मंगलवार को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू, मुख्यमंत्री माणिक साहा, कई मंत्री, मुख्य सचिव जितेंद्र कुमार सिन्हा, गृह सचिव अभिषेक सिंह, कार्यवाहक डीजीपी जी.एस. राव तथा वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने अनुराग को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सबसे पहले पुलिस मुख्यालय में और उसके बाद न्यू कैपिटल कॉम्प्लेक्स स्थित सिविल सचिवालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को परिजनों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ ओडिशा और दिल्ली होते हुए उत्तर प्रदेश के बरौत रवाना किया गया।

1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी अनुराग का शव सोमवार को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में उनके कार्यालय से जुड़े बाथरूम में फंदे से लटका मिला था। उन्हें तुरंत अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. प्रदीप भौमिक ने बताया कि अनुराग को अस्पताल लाए जाने तक उनके शरीर में जीवन के कोई संकेत नहीं थे। उन्होंने कहा कि मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।

घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री माणिक साहा, जो गृह विभाग भी संभालते हैं, मुख्य सचिव और गृह सचिव के साथ पुलिस मुख्यालय पहुंचे और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।

कार्यवाहक डीजीपी जी.एस. राव ने मंगलवार को कहा कि अनुराग की अस्वाभाविक मौत की जांच के लिए अलग से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किए जाने की संभावना है। फिलहाल पुलिस ने मामले में नियमित जांच शुरू कर दी है।

इस बीच, कांग्रेस और माकपा सहित सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने डीजीपी की मौत की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य और पूर्व मंत्री सुदीप रॉय बर्मन ने कहा कि त्रिपुरा हाईकोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच ही इस मामले की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगा सकती है।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार, नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी और वाम मोर्चा संयोजक माणिक डे ने भी अस्पताल पहुंचकर अनुराग के परिजनों से मुलाकात की और श्रद्धांजलि अर्पित की। जितेंद्र चौधरी ने भी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की।

अनुराग ने 17 मई 2025 को त्रिपुरा के डीजीपी का पदभार संभाला था। इससे पहले वे डीजीपी (इंटेलिजेंस) के पद पर कार्यरत थे।

तीन दशक से अधिक लंबे पुलिस करियर में उन्होंने लॉन्गथराई वैली के एसडीपीओ, पश्चिम और दक्षिण त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक, स्पेशल ब्रांच के एसपी, पुलिस मुख्यालय में सहायक महानिरीक्षक, कानून-व्यवस्था के महानिरीक्षक समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

वर्ष 2003-04 में उन्होंने कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी सेवाएं दीं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान वे सीबीआई में संयुक्त निदेशक और अतिरिक्त निदेशक रहे। इसके अलावा उन्होंने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में भी वरिष्ठ पदों पर कार्य किया।

अनुराग केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए बनाई गई विशेष जांच टीम (एसआईटी) के अध्यक्ष भी रहे। उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक और राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।

--आईएएनएस

डीएससी

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