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त्रिपुरा में पिछले 20 वर्षों में 2025 में सबसे कम अपराध दर दर्ज की गई: डीजीपी अनुराग

अगरतला, 8 जनवरी (आईएएनएस)। त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ ने गुरुवार को दावा किया कि राज्य की दोषसिद्धि दर 31 प्रतिशत है, जो पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे अधिक दरों में से एक है।
त्रिपुरा में पिछले 20 वर्षों में 2025 में सबसे कम अपराध दर दर्ज की गई: डीजीपी अनुराग

अगरतला, 8 जनवरी (आईएएनएस)। त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ ने गुरुवार को दावा किया कि राज्य की दोषसिद्धि दर 31 प्रतिशत है, जो पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे अधिक दरों में से एक है।

डीजीपी ने कहा कि राज्य में पिछले 20 वर्षों में 2025 में सबसे कम अपराध दर दर्ज की गई।

2025 के दौरान त्रिपुरा में समग्र अपराध परिदृश्य का विवरण देते हुए पुलिस प्रमुख ने कहा कि हत्या सहित सभी प्रकार के अपराधों में पिछले वर्ष (2024) की तुलना में 8.3 प्रतिशत की कमी आई है।

राज्य के सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग ने मीडिया को बताया कि हत्या सहित कुल अपराध के मामले 2024 में 4,033 थे, जो 2025 में घटकर 3,698 रह गए।

उन्होंने बताया कि संपत्ति से जुड़े अपराधों में 16 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2024 में 349 मामलों से घटकर 2025 में 293 मामले रह गए।

महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भी 8.14 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2024 में 724 मामलों से घटकर 2025 में 665 मामले रह गए।

डीजीपी ने कहा कि हत्या, डकैती, लूट, महिलाओं के खिलाफ अपराध, दंगे, सड़क दुर्घटनाएं और चोट व मारपीट के मामलों सहित विभिन्न श्रेणियों के अपराधों में कमी दर्ज की गई है।

डीजीपी अनुराग ने कहा कि त्रिपुरा की नशीली दवाओं के खतरे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्य पुलिस ने 2025 में मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।

उन्होंने दावा किया कि राज्य पुलिस ने 2024 की तुलना में 2025 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत 11 प्रतिशत अधिक मामले दर्ज किए हैं।

2025 में गांजा के पौधों सहित 1,636 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के मादक पदार्थों को नष्ट किया गया, जबकि 2024 में ऐसे पदार्थों का मूल्य 849 करोड़ रुपए था।

"नशा मुक्त त्रिपुरा" अभियान के अनुरूप मुख्यमंत्री माणिक साहा के राज्य पुलिस को दिए गए निर्देशों के बाद मादक पदार्थों के खिलाफ गहन कार्रवाई की गई।

डीजीपी ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज मामलों में 11.06 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 2024 में 470 मामलों से बढ़कर 2025 में 522 मामले हो गए हैं, जो बढ़ी हुई प्रवर्तन कार्रवाई को दर्शाता है।

--आईएएनएस

एमएस/

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