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आदिवासी कल्याण घोटाला: मंत्री बी नागेंद्र के बचाव में उतरे यतींद्र सिद्धारमैया, भाजपा ने साधा निशाना

आदिवासी कल्याण घोटाला: मंत्री बी नागेंद्र के बचाव में उतरे यतींद्र सिद्धारमैया, भाजपा ने साधा निशाना
आदिवासी कल्याण घोटाला: मंत्री बी नागेंद्र के बचाव में उतरे यतींद्र सिद्धारमैया, भाजपा ने साधा निशाना

बेंगलुरु, 23 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने आदिवासी कल्याण घोटाले के आरोपी राज्य के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र का बचाव किया है। यह बयान उस समय आया है, जब खबरें सामने आई हैं कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित घोटाले के संबंध में उनसे पूछताछ की अनुमति मांगते हुए राज्यपाल थावरचंद गहलोत को पत्र लिखा है। वहीं, विपक्ष के नेता आर. अशोक ने राज्य सरकार पर मंत्री को बचाने का आरोप लगाया है।

कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा कि कथित घोटाले में मंत्री बी. नागेंद्र की संलिप्तता साबित करने वाला कोई सबूत नहीं है और उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "ईडी और सीबीआई केंद्र सरकार के अधीन काम करती हैं। मंत्री नागेंद्र की संलिप्तता साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है। उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया है।"

नागेंद्र को 'दागी मंत्री' कहे जाने पर सवाल उठाते हुए यतींद्र ने कहा, "उन्हें दागी क्यों कहा जा रहा है? यह कहां साबित हुआ है? केवल ईडी और सीबीआई ने आरोप लगाए हैं।"

उन्होंने कहा कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित अनियमितताओं की जांच करने वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) को नागेंद्र को आरोपी बनाने लायक कोई सबूत नहीं मिला।

यतींद्र ने कहा, "सिर्फ इसलिए कि भाजपा बयान दे रही है या ईडी और सीबीआई आरोप लगा रहे हैं, हम उसे स्वीकार नहीं कर सकते।"

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में कहा था कि वाल्मीकि निगम से धन का दुरुपयोग हुआ है, यतींद्र ने स्वीकार किया कि निगम से धन बाहर गया था।

उन्होंने कहा, "हां, निगम से पैसा बाहर गया था। कुछ अधिकारियों या इसमें शामिल लोगों ने धन को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया था।"

यतींद्र ने दावा किया कि लगभग 89 करोड़ रुपए का गबन हुआ था और इसमें से करीब 74 करोड़ रुपए नकद एवं अन्य रूपों में जब्त किए जा चुके हैं, जबकि शेष करीब 10 करोड़ रुपए कारों और अन्य संपत्तियों की जब्ती के जरिए बरामद किए गए हैं।

उन्होंने कहा, "जो भी पैसा गायब हुआ था, वह बरामद कर लिया गया है। इसके बावजूद भाजपा झूठा दावा कर रही है कि कोई घोटाला हुआ है।"

वहीं, सीबीआई द्वारा राज्यपाल को भेजे गए कथित पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष के नेता आर. अशोक ने डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार पर मंत्रियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं देने का आरोप लगाया।

भाजपा नेता आर. अशोक ने कहा, "डीके शिवकुमार के मंत्रिमंडल में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है, इसलिए राज्य सरकार अभियोजन की मंजूरी नहीं दे रही है।"

उन्होंने दावा किया कि लोकायुक्त ने अलग-अलग मामलों में मंत्री बी. नागेंद्र, भाजपा नेता जनार्दन रेड्डी और पूर्व भाजपा मंत्री रेणुकाचार्य के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी है।

अशोक ने कहा, "अगर भाजपा सत्ता में होती तो जांच की अनुमति दे दी जाती।"

उन्होंने कहा कि भाजपा का आंदोलन विधानसभा के अंदर और बाहर जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर पार्टी राज्यपाल से भी मुलाकात करेगी।

अशोक ने कहा, "अंतिम विकल्प के रूप में हम राजभवन का दरवाजा खटखटाएंगे। हम विरोध के अन्य तरीकों पर भी फैसला करेंगे।"

उन्होंने आरोपपत्र में कथित रूप से शामिल विवरणों का हवाला देते हुए दावा किया कि निगम का पैसा करीब 600 बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया और उससे लग्जरी कारें तथा सोना खरीदा गया।

अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि धनराशि नागेंद्र के रिश्तेदारों, सहयोगियों, फार्महाउस मालिकों तथा कुछ अधिकारियों के खातों में भी पहुंची।

उन्होंने कहा, "सभी दस्तावेज विधानसभा में पेश किए जा चुके हैं।"

सिद्धारमैया के उस पुराने बयान का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्होंने 187 करोड़ रुपए के बजाय 89 करोड़ रुपए के गबन की बात कही थी, अशोक ने सवाल उठाया कि फिर नागेंद्र को कैसे क्लीन चिट दी जा सकती है।

उन्होंने कहा, "जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे, तब नागेंद्र को चोर कहा गया था, लेकिन डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद वह निर्दोष कैसे हो गए?"

अशोक ने यह भी दावा किया कि नागेंद्र की गिरफ्तारी के बाद उनकी संपत्तियां जब्त की गई थीं और सवाल उठाया कि यदि कोई गलत काम नहीं हुआ था तो ऐसी कार्रवाई क्यों की गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि नागेंद्र और उनके सहयोगी नेक्कुंडी नागराज के बीच हुई बातचीत भी जांच रिकॉर्ड का हिस्सा है और एसआईटी रिपोर्ट में भी नागेंद्र का नाम शामिल है।

बता दें कि भाजपा आदिवासी कल्याण निधि घोटाले को लेकर नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रही है, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस का कहना है कि उनकी संलिप्तता साबित करने वाला कोई ठोस सबूत नहीं है और मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही निपटाया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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