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केलावरपल्ली बांध के पास साउथ पेन्नई नदी में जहरीले झाग से बुरा हाल, किसानों ने की कार्रवाई की मांग

केलावरपल्ली बांध के पास साउथ पेन्नई नदी में जहरीले झाग से बुरा हाल, किसानों ने की कार्रवाई की मांग
केलावरपल्ली बांध के पास साउथ पेन्नई नदी में जहरीले झाग से बुरा हाल, किसानों ने की कार्रवाई की मांग

चेन्नई, 1 जुलाई (आईएएनएस)। होसुर में केलावरपल्ली बांध के पास दक्षिण पेन्नई नदी में लगातार जमा हो रहे जहरीले झाग ने कृष्णगिरि जिले के किसानों को चिंतित कर दिया है। किसान तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार से मांग कर रहे हैं कि वे मिलकर प्रदूषण के स्रोत की जांच करें और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएं।

नदी में लगभग एक महीने से झाग दिखाई दे रहा है और कर्नाटक में हाल ही में हुई बारिश के बाद यह और बढ़ गया है, जिससे केलावरपल्ली बांध में पानी का बहाव भी बढ़ गया है।

किसानों को डर है कि पानी की खराब होती गुणवत्ता का सिंचाई, खेती और नदी के पूरे इकोलॉजिकल स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। केलावरपल्ली बांध इस इलाके में हजारों एकड़ खेती की जमीन के लिए सिंचाई का एक अहम जरिया है। इस जलाशय पर निर्भर किसानों ने चिंता जताई है कि लगातार प्रदूषण से फसल की खेती पर खतरा मंडरा सकता है और कमांड एरिया में खेती की लंबे समय तक चलने की क्षमता कम हो सकती है।

स्थानीय किसान संगठनों का मानना ​​है कि यह प्रदूषण मुख्य रूप से साउथ पेन्नई नदी में ऊपर की तरफ (अपस्ट्रीम) बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज मिलने की वजह से है, खासकर कर्नाटक के शहरी इलाकों से। उन्होंने तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों राज्यों में नदी के किनारे मौजूद मिलों समेत सभी इंडस्ट्रियल यूनिट्स की व्यापक जांच की भी मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इंडस्ट्री से निकलने वाला कचरा भी इस प्रदूषण की वजह है।

किसान संगठनों के प्रतिनिधि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से मिलकर तुरंत कदम उठाने और दोनों राज्यों को शामिल करते हुए एक समन्वित कार्य योजना बनाने की मांग करेंगे।

उन्होंने प्रदूषण के सही स्रोतों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और बिना ट्रीट किए गए कचरे को नदी में जाने से रोकने के उपाय लागू करने की मांग की है।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नदी के पानी की नियमित निगरानी हर महीने की जा रही है। शुरुआती नतीजों से सल्फेट और फॉस्फेट का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है, जो आमतौर पर केमिकल इंडस्ट्री के कचरे के बजाय सीवेज के प्रदूषण से जुड़े होते हैं।

विभाग ने यह भी पाया है कि प्रभावित हिस्से में घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर एक मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे गिर गया है, जो पानी की बहुत खराब गुणवत्ता को दर्शाता है और इसमें मछली सहित जलीय जीवन का पनपना मुश्किल है।

पानी के सैंपल लगातार लिए जा रहे हैं और क्वालिटी से जुड़े अलग-अलग पैमानों की बारीकी से जांच के लिए चेन्नई और पोलाची की लैब में भेजे जा रहे हैं। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी प्रदूषण के स्तर का पता लगाने के लिए स्वतंत्र रूप से सैंपल ले रहा है।

किसानों ने अधिकारियों से जांच में तेजी लाने और प्रदूषण को रोकने के लिए लंबे समय तक चलने वाले उपाय लागू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दक्षिण पेन्नई नदी की हालत लगातार बिगड़ती रही, तो इस इलाके में खेती, जैव-विविधता और लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।

--आईएएनएस

ओपी/पीएम

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