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'पल्लीचट्टांबी' के लिए चर्च का सेट इतना शानदार था कि एक बुजुर्ग उसे असली समझ बैठे : टोविनो थॉमस (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

चेन्नई, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। मलयालम फिल्म 'पल्लीचट्टांबी' को लेकर अभिनेता टोविनो थॉमस ने एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया। इस फिल्म में वे मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और इसका निर्देशन डिजो जोस एंटनी कर रहे हैं।
'पल्लीचट्टांबी' के लिए चर्च का सेट इतना शानदार था कि एक बुजुर्ग उसे असली समझ बैठे : टोविनो थॉमस (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

चेन्नई, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। मलयालम फिल्म 'पल्लीचट्टांबी' को लेकर अभिनेता टोविनो थॉमस ने एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया। इस फिल्म में वे मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और इसका निर्देशन डिजो जोस एंटनी कर रहे हैं।

आईएएनएस के साथ इंटरव्यू के दौरान टोविनो थॉमस ने बताया कि फिल्म के लिए बनाया गया चर्च का सेट इतना असली लग रहा था कि एक बुजुर्ग व्यक्ति उसे असली समझकर वहीं प्रार्थना करने लगे।

टोविनो थॉमस ने बताया कि फिल्म की कहानी 1958 के दौर पर आधारित है, जो उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण था।

उन्होंने कहा, "मैं 1989 में पैदा हुआ हूं, इसलिए 90 के दशक के बारे में मुझे कुछ जानकारी थी। मैंने उसे फिल्मों और अपने अनुभव में देखा है। लेकिन, 1950 का दौर मेरे लिए बिल्कुल नया था। यहां तक कि मेरे पिता भी 1952 में पैदा हुए थे, यानी हमें उस समय के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।"

उन्होंने बताया कि उस दौर को दिखाने के लिए टीम ने पुराने फोटो, किताबों और विवरणों का सहारा लिया। उसी आधार पर पूरे सेट को डिजाइन किया गया। शूटिंग के लिए थोडुपुझा इलाके में एक बड़े हिस्से को गांव का रूप दिया गया, जहां कई दिनों तक शूटिंग हुई।

टोविनो थॉमस ने आगे कहा, "हमें एक चर्च बनाना था, और सिर्फ बाहर से नहीं, बल्कि अंदर का पूरा हिस्सा भी तैयार किया गया। शूटिंग के दौरान एक बुजुर्ग महिला वहां आईं और उन्होंने उसे असली चर्च समझकर प्रार्थना करना शुरू कर दिया। हमें लगा कि उन्हें बताना चाहिए कि यह असली चर्च नहीं है, लेकिन हम ऐसा कर नहीं पाए, क्योंकि प्रार्थना तो प्रार्थना होती है। वहीं, हमें इस बात की खुशी भी थी कि हमारा सेट इतना वास्तविक लग रहा था।"

उन्होंने यह भी कहा कि निर्देशक ने पूरे इलाके को इतनी बारीकी से तैयार किया कि वह एक असली गांव जैसा नजर आता था। वहां दुकानें, इमारतें, चर्च और एक चौराहा बनाया गया था। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ एक बांध के किनारे था, जिसे पूरी तरह बदलकर गांव का रूप दिया गया।

--आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम

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