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तमिलनाडु डेल्टा क्षेत्र के किसानों ने सूखे की घोषणा की मांग की, मेट्टूर जलाशय से पानी छोड़ने पर अनिश्चितता

तिरुचि, 11 जून (आईएएनएस)। मेट्टूर डैम से 12 जून को हर साल होने वाली परंपरागत जल रिलीज इस बार कम जल स्तर के कारण संभव नहीं दिख रही है। इसी को लेकर कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से मांग की है कि डेल्टा जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए और कूरुवई खेती की स्थिति पर सभी हितधारकों की बैठक बुलाई जाए।
तमिलनाडु डेल्टा क्षेत्र के किसानों ने सूखे की घोषणा की मांग की, मेट्टूर जलाशय से पानी छोड़ने पर अनिश्चितता

तिरुचि, 11 जून (आईएएनएस)। मेट्टूर डैम से 12 जून को हर साल होने वाली परंपरागत जल रिलीज इस बार कम जल स्तर के कारण संभव नहीं दिख रही है। इसी को लेकर कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से मांग की है कि डेल्टा जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए और कूरुवई खेती की स्थिति पर सभी हितधारकों की बैठक बुलाई जाए।

मेट्टूर जलाशय डेल्टा क्षेत्र की सिंचाई का मुख्य स्रोत है। हर साल 12 जून को यहां से पानी छोड़ा जाता है और 28 जनवरी तक सिंचाई जारी रहती है। लेकिन यह पानी तभी छोड़ा जाता है जब जल स्तर पर्याप्त हो।

इस समय जलाशय का स्तर 79.69 फीट और भंडारण 41.648 टीएमसी है, जो सामान्य रूप से पानी छोड़ने के लिए आवश्यक स्तर से काफी कम है। इस कारण किसानों में चिंता बढ़ गई है, खासकर उन किसानों में जो नदी के पानी पर निर्भर हैं।

कुछ किसानों ने पहले ही स्थिति को भांपकर इस सीजन में खेती नहीं की, जबकि कुछ ने बोरवेल सिंचाई पर भरोसा करके बुवाई की है।

कृषि विभाग के अनुसार इस साल करीब 3.5 लाख एकड़ में कूरुवई खेती होने का अनुमान है। लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि वास्तविक क्षेत्र इससे काफी कम हो सकता है क्योंकि बोरवेल चलाने के लिए बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है।

किसानों के अनुसार सिंचाई पंप चलाने के लिए लगातार और बिना रुकावट बिजली जरूरी है। लेकिन बार-बार होने वाली बिजली कटौती से सिंचाई प्रभावित हो रही है, जिससे कई इलाकों में फसल सूखने लगी है।

किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि इस साल खेती का क्षेत्र पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम हो सकता है, जब मेट्टूर से समय पर पानी छोड़ने के कारण 6 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में खेती हुई थी।

उन्होंने यह भी कहा कि कम खेती होने से धान उत्पादन घटेगा, जिससे किसानों और खेतिहर मजदूरों दोनों पर असर पड़ेगा।

किसानों ने सरकार से मांग की है कि अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों और किसान प्रतिनिधियों के साथ त्रिपक्षीय बैठक बुलाई जाए, ताकि स्थिति का आकलन कर वैकल्पिक फसलों और जल प्रबंधन पर निर्णय लिया जा सके।

उन्होंने यह भी अपील की है कि कावेरी डेल्टा क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित करने के लिए केंद्र से सहायता ली जाए, ताकि समय रहते कदम उठाकर फसल नुकसान को रोका जा सके और ग्रामीण आजीविका सुरक्षित की जा सके।

--आईएएनएस

एएमटी/एएस

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