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तमिलनाडु : डेल्टा क्षेत्र के किसानों ने केंद्र सरकार से की धान पर अंतरिम एमएसपी बढ़ाने की मांग

तिरुचि, 8 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु में किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से धान सहित कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अंतरिम बढ़ोतरी की घोषणा करने की मांग की है। उन्होंने ईंधन और खाद की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और संभावित 'अल नीनो' घटना से जुड़े मौसम के हालात को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का हवाला दिया है।
तमिलनाडु : डेल्टा क्षेत्र के किसानों ने केंद्र सरकार से की धान पर अंतरिम एमएसपी बढ़ाने की मांग

तिरुचि, 8 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु में किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से धान सहित कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अंतरिम बढ़ोतरी की घोषणा करने की मांग की है। उन्होंने ईंधन और खाद की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और संभावित 'अल नीनो' घटना से जुड़े मौसम के हालात को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का हवाला दिया है।

यह मांग 1 सितंबर से 2026-27 मार्केटिंग वर्ष के लिए एमएसपी लागू होने से पहले की गई है।

केंद्र सरकार ने 13 मई को एमएसपी की संशोधित दरें घोषित की थीं, जिसमें धान की सामान्य और बढ़िया दोनों किस्मों की खरीद कीमत में 72 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी। हालांकि, किसान प्रतिनिधियों का तर्क है कि खेती की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए यह बढ़ोतरी नाकाफी है।

कृषि उत्पादों के लिए एमएसपी हर साल भारत सरकार द्वारा 'कृषि लागत और मूल्य आयोग' (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर तय किया जाता है। समर्थन मूल्य तय करते समय उत्पादन लागत, बाजार के रुझान, मांग और आपूर्ति की स्थिति और व्यापक आर्थिक पहलुओं जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाता है।

तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ के सचिव स्वामीमलाई एस. विमलनाथन ने कहा कि एमएसपी की घोषणा के समय जो हालात थे, वे अब काफी बदल चुके हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह अगस्त में सीएसीपी की बैठक फिर से बुलाए और खरीद का नया सीजन शुरू होने से पहले समर्थन मूल्यों की नए सिरे से समीक्षा करे।

उनके अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईंधन की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं और आने वाले महीनों में इनमें और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे किसानों पर वित्तीय बोझ और बढ़ जाएगा।

उन्होंने तमिलनाडु के सांसदों से भी अपील की कि वे केंद्र के सामने सामूहिक रूप से यह मुद्दा उठाएं और एमएसपी दरों में संशोधन की मांग करें। इसके अलावा, किसानों ने 2026 के दौरान तेजी से विकसित हो रहे 'अल नीनो' की खबरों पर भी चिंता जताई है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में असामान्य गर्मी से बारिश के वैश्विक पैटर्न बदल सकते हैं, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और किसानों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक और पर्यावरणविद् भास्कर राज ने कहा कि कृषि नीति संबंधी फैसलों में जलवायु से जुड़ी अनिश्चितताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौसम के बदलते पैटर्न के कारण फसल की पैदावार कम हो सकती है और किसान समुदायों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।

एक और बड़ी चिंता हाल ही में खाद की कीमतों में हुई बढ़ोतरी है। किसानों ने बताया कि हाल के हफ्तों में पोटाश, अमोनियम सल्फेट और एनपीके खाद की कीमतों में 50 रुपए से लेकर 400 रुपए प्रति 50-किलो बैग तक की बढ़ोतरी हुई है। तिरुवेरुम्बुर के किसान मेय्याझगन ने कहा कि एमएसपी में अंतरिम बढ़ोतरी से बहुत जरूरी राहत मिलेगी और खेती के लिए चुनौतीपूर्ण होते जा रहे इस सीजन में किसानों को बढ़ती लागत को संभालने में मदद मिलेगी।

--आईएएनएस

एससीएच/पीएम

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