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सुबह की बजाय दोपहर में हार्ट सर्जरी के नतीजे अच्छे: स्टडी में खुलासा, रिस्क हो सकता है कम

नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। एक नई स्टडी के अनुसार, हार्ट सर्जरी का समय मरीज के रिकवरी और सर्वाइवल रेट को प्रभावित कर सकता है।
सुबह की बजाय दोपहर में हार्ट सर्जरी के नतीजे अच्छे: स्टडी में खुलासा, रिस्क हो सकता है कम

नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। एक नई स्टडी के अनुसार, हार्ट सर्जरी का समय मरीज के रिकवरी और सर्वाइवल रेट को प्रभावित कर सकता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन में 90,000 से अधिक हार्ट सर्जरी के डेटा का विश्लेषण किया और पाया कि सुबह 10 से 12 बजे के बीच की सर्जरी में हार्ट से जुड़ी मौत का खतरा सुबह जल्दी (7 से 10 बजे) की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक हो सकता है।

स्टडी में यह भी सामने आया कि दोपहर या शाम की सर्जरी में मरीजों को कम जटिलताएं हुईं, जैसे कि हार्ट फेलियर या मायोकार्डियल इंफार्क्शन। शोधकर्ताओं का मानना है कि बॉडी क्लॉक (सर्कैडियन रिदम) और हार्ट टिशू की रिकवरी क्षमता समय के साथ बदलती है, जिससे दोपहर की सर्जरी ज्यादा सुरक्षित साबित हो सकती है। हालांकि, कुछ अन्य स्टडीज में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया।

दोपहर के समय को इसलिए सही माना गया क्योंकि कुछ लोगों की बॉडी क्लॉक उन्हें सुबह जल्दी उठने वाला बनाती है और कुछ को रात में जागने वाला बनाती है।

इंग्लैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड में 24,000 से ज्यादा मरीजों वाले राष्ट्रीय डेटासेट का आकलन कर नतीजे से रूबरू कराया।

हालांकि कॉम्प्लिकेशन रेट और दोबारा भर्ती होने पर दिन के समय का कोई असर नहीं पड़ा, फिर भी नतीजे हार्ट सर्जरी शेड्यूल करने के सबसे अच्छे समय के बारे में सवाल खड़े करते हैं।

जर्नल एनेस्थीसिया में छपी यह स्टडी पूरी सर्जरी पर बॉडी क्लॉक—हमारे सेल्स और अंगों में मौजूद 24 घंटे के बायोलॉजिकल साइकिल का एक सेट—के संभावित असर के बारे में भी एक जरूरी जानकारी देती है।

मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में क्लिनिकल सीनियर लेक्चरर और मुख्य लेखक डॉ. गैरेथ किचन ने कहा, “यह रिसर्च दिखाती है कि जब हार्ट सर्जरी सुबह देर से शुरू होती है, तो दिल से जुड़ी मौत का खतरा थोड़ा ज्यादा होता है। टाइमिंग से जुड़े नतीजों में छोटे-मोटे सुधार भी मरीजों के लिए काफी फायदेमंद हो सकते हैं।”

किचन ने कहा, “लोगों के बीच बॉडी क्लॉक बायोलॉजी कैसे अलग-अलग होती है, इसकी ज्यादा समझ के साथ मरीजों की व्यक्तिगत स्थिति और अन्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाना चाहिए।”

--आईएएनएस

केआर/

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