दिल्ली बिल्डिंग हादसा : 'लगा पैर कट जाएगा', मलबे से निकाले गए छात्र ने बताई दर्दनाक कहानी
जम्मू, 10 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने से सात लोगों की मौत के कुछ दिनों बाद, जम्मू के रहने वाले नीतीश ने मलबे में घंटों फंसे रहने का अपना अनुभव बताया। उन्हें आखिरकार रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाला।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के मोतीलाल नेहरू कॉलेज के अंडरग्रेजुएट छात्र नीतीश बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर नीरज नाम के एक दूसरे लड़के के साथ रहते थे।
उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि जब बिल्डिंग गिरी, तो उसके अंदर नौ से दस छात्र मौजूद थे। बेसमेंट में कुछ कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था। जब बिल्डिंग गिरी, तो मैं नीरज के साथ उसके कमरे में बैठा था। यह सब अचानक हुआ। हमें संभलने का कोई मौका नहीं मिला।
उन्होंने उस भयानक पल को याद करते हुए कहा, "जब हम मलबे के नीचे फंसे थे, तो मेरे पास वाले लड़के ने अपने सीनियर्स को फोन किया और उन्हें अपनी लोकेशन भेजी। मेरे पास फोन नहीं था, लेकिन शुक्र है कि उसके पास था। जानकारी मिलने पर सीनियर्स मौके पर पहुंचे, हमें देखा और रेस्क्यू टीम को उस जगह बुलाया, जहां हम फंसे हुए थे।"
उन्होंने कहा, "रेस्क्यू में घंटों लग गए, मेरे शरीर का ऊपरी हिस्सा तो बाहर निकाला जा सका, लेकिन मेरा एक पैर अंदर ही फंसा रह गया। उसे बाहर निकालने में काफी समय लगा। मुझे तो लगा कि मेरा पैर कट जाएगा, लेकिन शुक्र है कि ऐसा नहीं हुआ।"
नीतीश ने बताया कि मलबे के नीचे फंसे होने के दौरान एक समय ऐसा आया, जब उन्हें बचने की उम्मीद ही नहीं रही। उन्होंने कहा, "कुछ लोग कह रहे थे कि बगल वाली बिल्डिंग भी गिर जाएगी, अगर ऐसा होता, तो बचने का कोई चांस नहीं था।"
नीतीश ने कहा कि उन्होंने रेस्क्यू के बाद राहत की सांस ली। उनके फ्लैटमेट नीरज की दो सर्जरी हो चुकी है और डॉक्टरों का कहना है कि वह ठीक हो रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए कहा, "उन्होंने हमें हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया और यह भी कहा कि हम सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, डीयू के छात्र ने अधिकारियों से पुरानी इमारतों की हालत पर नजर रखने की अपील करते हुए कहा, "हमारे साथ जो हुआ, वह दोबारा नहीं होना चाहिए।"
वहीं, नीतीश की मां ने बताया कि उन्हें इस हादसे के बारे में उसके एक दोस्त का मैसेज मिलने पर पता चला।
उन्होंने आईएएनएस को बताया, "उसके दोस्त ने मेरी बेटी को हादसे के बारे में बताया, जिसके बाद वह रोने लगी, लेकिन उसने मुझे कुछ नहीं बताया। जब मैंने उस नंबर पर वापस कॉल किया, तो मुझे पता चला कि इमारत गिर गई थी और नीतीश मलबे के नीचे फंसा हुआ था, उसके बारे में और कोई जानकारी नहीं थी।"
उन्होंने आगे कहा, "अगले ही पल, बिना कुछ सोचे या घटना के बारे में कोई और जानकारी लिए, मैं एयरपोर्ट के लिए निकल पड़ी। नीतीश की बहन और कजिन भी एयरपोर्ट पहुंच गए थे। उन्होंने टिकट बुक किए और शाम की फ्लाइट से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। मैं घर लौट आई क्योंकि मैं उस खबर से बहुत परेशान थी, मैं अपने कागजात वहीं छोड़ आई थी।"
नीतीश की मां ने बताया कि वह और परिवार के अन्य सदस्य बाद की फ्लाइट से राजधानी पहुंचे।
उन्होंने याद करते हुए कहा, "हम उस दिन रात 9.30 बजे तक अस्पताल पहुंच गए थे। उसके कजिन पहले ही पहुंच चुके थे और उन्होंने मुझे बताया था कि नीतीश ठीक है, लेकिन फिर भी जब तक मैंने उसे अस्पताल में इलाज करवाते हुए नहीं देखा, मुझे चैन नहीं मिला।"
उनकी मां ने आगे बताया कि जब तक परिवार अस्पताल पहुंचा, तब तक तीन छात्रों की मौत हो चुकी थी। उन्होंने कहा, "उनकी लाशें देखकर मैं सदमे में आ गई, वह दृश्य अभी भी मेरे दिमाग से नहीं निकल रहा है।"
--आईएएनएस
एएसएच/एबीएम

