शशि थरूर को अपनी तरफ खींचने की कोशिश में जुटीं लेफ्ट पार्टियां, अब कांग्रेस हाईकमान सतर्क
तिरुवनंतपुरम, 26 जनवरी (आईएएनएस)। जब शशि थरूर हों तो बोरिंग पल शायद ही कभी आता है। उनका पॉलिटिकल करियर उतना ही दिलचस्प है, जितने अच्छे से तिरुवनंतपुरम के सांसद अपनी बात रखते हैं। अब खबर है कि कांग्रेस टेंशन में है, क्योंकि केरल के राजनीतिक गलियारों में ऐसी अफवाहें चल रही हैं कि लेफ्ट पार्टियां शशि थरूर को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रही हैं।
सांसद के तौर पर अपने चौथे कार्यकाल में शशि थरूर इस वक्त ऐसे विवादों से दूरी बना रहे हैं जो उनकी चुनावी राजनीति को नुकसान पहुंचाए। साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले व्यक्तिगत आरोपों और उन पर हो रही जांच ने उन्हें परेशान किया था।
वह तब और उसके बाद कई सालों तक बिना किसी नुकसान के बाहर निकले और कांग्रेस में एक ऐसी जगह बनाई जो राजनीतिक साजिशों के बजाय बौद्धिक चमक से ज्यादा पहचानी जाती थी।
हालांकि, अब उस छवि पर फिर से दबाव पड़ रहा है। हफ्तों से उन कारणों से थरूर खबरों में हैं जिन्होंने कांग्रेस के लोगों को परेशान कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी कथित गर्मजोशी, कभी-कभी उदार, कभी-कभी पार्टी के साथियों के लिए बहुत असहज, ने उनको लेकर सुगबुहाट शुरू कर दी थी कि क्या वे भी बाकी कांग्रेसी नेताओं की तरह भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
इन दिनों केरल के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि शशि थरूर दुबई गए और एक मिडिल ईस्ट के बिजनेसमैन से बातचीत की, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के करीबी हैं।
ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट थरूर को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, बिना पुष्टि के लगातार किए जा रहे दावों से पता चलता है कि विजयन थरूर को इस तरह से राजनीतिक समर्थन देने को तैयार हैं जिससे केरल में कांग्रेस कमजोर हो सकती है।
यह अटकलें और भी आगे जाती हैं।
राजनीतिक गलियारों में चल रही खबरों के अनुसार, अगर शशि थरूर कांग्रेस छोड़ देते हैं, तो लेफ्ट उन्हें पुरानी पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए एक नई पार्टी बनाने के लिए 15 विधानसभा सीटें देने को तैयार हो सकता है। साथ ही लोकसभा में तिरुवनंतपुरम से थरूर की उम्मीदवारी के लिए लगातार समर्थन भी देगा।
हालांकि, अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अटकलों ने ही कांग्रेस खेमे को हिला दिया है।
लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के संयोजक टीपी रामकृष्णन ने थरूर के संभावित रूप से सीपीआई (एम) में शामिल होने से संबंधित चर्चाओं से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जो कोई भी लेफ्ट विचारधारा से सहमत है, उसका स्वागत है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शशि थरूर, जिन्हें कथित तौर पर पिछले हफ्ते कोच्चि में हुई महापंचायत में राहुल गांधी ने हाथ मिलाने से इनकार करके और नाम से भी पहचान न देकर नजरअंदाज किया था, लेफ्ट की ओर हाथ बढ़ाएंगे।
राहुल गांधी के साथ हुए वाकये के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे सीपीआई (एम) द्वारा थरूर को अपने साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इस बढ़ते संकट के बीच कांग्रेस हाईकमान चुनावी नुकसान को कम करने के लिए तेजी से कदम उठाता दिख रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन, वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा व्यक्तिगत रूप से थरूर से संपर्क कर सकते हैं।
शशि थरूर से संपर्क करने का उद्देश्य उनकी चिंताओं को दूर करना, पार्टी में उनके महत्व का आश्वासन देना और उन्हें वह सम्मान और राजनीतिक जगह देना है जिसके वे हकदार हैं।
अब सबकी नजरें थरूर के अगले कदम पर हैं कि क्या वे आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए रोड मैप तैयार करने के लिए मंगलवार और बुधवार को होने वाली कांग्रेस नेतृत्व की महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल होंगे?
पिछले हफ्ते इसी तरह की एक बैठक में उनकी गैरमौजूदगी ने रहस्य को और गहरा कर दिया, जिससे अटकलें एक पूरे राजनीतिक सस्पेंस में बदल गईं, जो अब इस बात पर निर्भर करता है कि बातचीत ड्रामे पर हावी हो पाती है या नहीं।
--आईएएनएस
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