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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा-आतंकवाद को मानवता के विरुद्ध अपराध माना जाना चाहिए

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा-आतंकवाद को मानवता के विरुद्ध अपराध माना जाना चाहिए
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा-आतंकवाद को मानवता के विरुद्ध अपराध माना जाना चाहिए

संयुक्त राष्ट्र, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र में जनरल असेंबली की छठी कमेटी की बैठक में भारत ने कहा कि मानवता के खिलाफ अपराधों की सजा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले नए समझौते में आतंकवाद को भी शामिल किया जाना चाहिए।

भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन की काउंसलर आर. मैथिली ने सोमवार को कहा, "आतंकवादियों द्वारा किए गए अपराध और अत्याचार, अगर वे जरूरी पैमानों पर खरे उतरते हैं, तो उन्हें 'मानवता के खिलाफ अपराध' के दायरे में उचित रूप से शामिल किया जाना चाहिए।"

असेंबली की छठी कमेटी की बैठक कानूनी मामलों को देखती है। यह बैठक 'इंसानियत के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और सजा' पर 2028 में होने वाले सम्मेलन के बारे में थी, जिसमें एक अंतरराष्ट्रीय संधि को अपनाया जाना है।

मैथिली ने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों की "गंभीर प्रकृति" और लोगों पर उनके असर को देखते हुए इस पर (अंतरराष्ट्रीय संधि के) ड्राफ्ट आर्टिकल्स के कुल नजरिए के हिसाब से विचार किया जाना चाहिए, न कि मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं को बस नई संधि में शामिल कर लिया जाए।

उन्होंने कहा कि देशों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार, मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और बड़े पैमाने पर होने वाले अत्याचारों के मामलों में न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि संधि को इस सिद्धांत को मजबूत करना चाहिए कि इंसानियत के खिलाफ अपराधों से लोगों की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी देशों की है। साथ ही, उन्होंने कहा कि देशों की यह भी जिम्मेदारी है कि वे अपने नागरिकों द्वारा किए गए "मानवाधिकारों के सबसे गंभीर उल्लंघन और बड़े पैमाने पर अत्याचारों" के मामलों में न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करें।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय के हितों, आरोपी के अधिकारों और पीड़ितों के हितों को ध्यान में रखते हुए देशों को अधिकार-क्षेत्र में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

मैथिली ने कहा कि मानवता के खिलाफ अपराधों को रोकने और सजा देने के उपायों में देशों की संप्रभुता और उनके आंतरिक मामलों में दखल न देने के सिद्धांत का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।

जनरल असेंबली ने 2004 में एक प्रस्ताव के जरिए 2028 में मानवता के खिलाफ अपराधों को रोकने और सजा देने पर एक सम्मेलन आयोजित करने का आह्वान किया था। इसके लिए दो तैयारी-संबंधी सम्मेलन होने थे, जिनमें से पहला सम्मेलन कन्वेंशन पर बातचीत और उसका मसौदा तैयार करने के लिए जनवरी में आयोजित किया गया था।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस सम्मेलन का लक्ष्य मानवता के खिलाफ अपराधों को रोकने और सजा देने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता अपनाना है।

--आईएएनएस

ओपी/एएस

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