मणिपुर के तीन पहाड़ी जिलों में तनाव, हिंसा में मृतकों की संख्या 9 हुई; सीएम ने की शांति की अपील
इंफाल, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। मणिपुर के तीन पहाड़ी जिलों कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी में रविवार को तनाव बना रहा। नागा और कुकी समुदायों के बीच ताजा हिंसक झड़पों में मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। मृतकों में एक महिला भी शामिल है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार और शनिवार को हुई हिंसा में छह नागा, दो कुकी और गोरखा समुदाय के एक किसान की मौत हुई। इस साल मणिपुर में हुई हिंसक घटनाओं में इसे सबसे घातक घटनाक्रमों में से एक माना जा रहा है। हालांकि, रविवार को तीनों पहाड़ी जिलों से किसी नई हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने हिंसा और निर्दोष नागरिकों की हत्या की निंदा करते हुए लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्थिति पर काबू पाने और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और फेसबुक पर पोस्ट कर कहा, "मैं कामजोंग और कांगपोकपी जिलों में निर्दोष नागरिकों की हत्या और हुई हिंसा की निंदा करता हूं। मैंने अधिकारियों को स्थिति नियंत्रित करने, शांति एवं कानून-व्यवस्था बहाल करने और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है।"
उन्होंने विभिन्न समुदायों के जनप्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों से आगे आने, संयम बरतने और तनाव कम करने में सहयोग करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने समाज के सभी वर्गों से शांति, संवाद और आपसी सद्भाव को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
अधिकारियों के अनुसार, हिंसा की आशंका को देखते हुए प्रभावित तीनों जिलों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और मणिपुर पुलिस ने गश्त तथा तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं, ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।
ताजा हिंसा शुक्रवार रात कामजोंग जिले के चासाद गांव में 42 वर्षीय महिला की हत्या के बाद शुरू हुई। हालांकि कामजोंग जिले में मुख्य रूप से नागा समुदाय की आबादी है, लेकिन चासाद गांव में कुकी समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं। पुलिस के एक अधिकारी ने इंफाल में बताया कि पांच बच्चों की मां डोमखोनेई ताउथांग को गर्दन के पास गोली लगी थी। गोली लगने के कुछ ही मिनटों के भीतर उनकी मौत हो गई।
महिला की हत्या के बाद कुकी और नागा समुदायों के सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार तक जारी रही। इस दौरान 23 वर्षीय एक युवक की भी मौत हो गई और 10 मकानों को आग के हवाले कर दिया गया। कुकी-जो संगठनों ने महिला की हत्या के लिए सुरक्षा बलों और नागा सशस्त्र समूह को जिम्मेदार ठहराया है।
हिंसा के बाद कामजोंग के जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, आग्नेयास्त्रों और अन्य संभावित खतरनाक वस्तुओं को ले जाने तथा प्रतिबंधित क्षेत्र में आवाजाही पर रोक लगा दी गई।
कांगपोकपी जिले में शनिवार को एक अलग घटना में संदिग्ध उग्रवादियों ने टापोन और मकुई गांवों पर हमला किया। अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में नागा समुदाय के दो ग्राम रक्षकों एम. दैमाई और आर. गंगमेई समेत तीन लोगों की मौत हो गई। तीसरे मृतक की पहचान रिंगकांगमाई के रूप में हुई है।
नागा नागरिक संगठन वर्किंग कमेटी जेटीसी मणिपुर ने दावा किया कि 52 वर्षीय ग्रामीण अजिनबौ आर. का उग्रवादियों ने सिर कलम कर दिया। संगठन ने परिवार को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने देने के लिए उनका कटा हुआ सिर वापस लौटाने की मांग की।
एक अन्य हमले में कामजोंग जिले के भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित तांगखुल नागा बहुल निंगचौ गांव में संदिग्ध उग्रवादियों ने गोलीबारी की। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में 35 वर्षीय नगाचांसो निंगशेन और 48 वर्षीय लेइशिशान लेइशादांग की मौत हो गई।
हमले की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बल गांव पहुंचे। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि हथियारबंद हमलावर म्यांमार की ओर भाग गए।
वहीं, उखरुल जिले में चेपू याओलेन के पास संदिग्ध उग्रवादियों ने एक वाहन पर कथित तौर पर गोलीबारी की, जिसमें 40 वर्षीय संदीप राय की मौत हो गई। नेपाली समुदाय से ताल्लुक रखने वाले राय उस समय अपनी कार चला रहे थे और उन्होंने वाहन के भीतर ही दम तोड़ दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस साल फरवरी से प्रभावित जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच हुई झड़पों में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में मकान जला दिए गए हैं। हिंसा मुख्य रूप से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तमेंगलोंग और नोनी जिलों के साथ-साथ सेनापति जिले के कुछ हिस्सों में केंद्रित रही है।
--आईएएनएस
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