तेलंगाना : मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ पर बुनकरों की रचनात्मकता की सराहना की
हैदराबाद, 7 अगस्त (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने शुक्रवार को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राज्य के बुनकरों को बधाई दी।
गवर्नर शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि तेलंगाना के बुनकरों की लगन, कौशल और रचनात्मकता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
एक संदेश में गवर्नर ने हथकरघा को भारत की सांस्कृतिक विरासत का गौरवपूर्ण प्रतीक बताया और तेलंगाना के बुनकरों की तारीफ करते हुए उन्हें कुशल कारीगर कहा, जिनकी लगन, हुनर और रचनात्मकता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि पोचमपल्ली इकत, गडवाल, नारायणपेट, सिरसिल्ला और कोठाकोटा जैसी मशहूर हथकरघा परंपराएं तेलंगाना की समृद्ध कपड़ा विरासत को दर्शाती हैं।
गवर्नर ने कहा, "हमारे बुनकर हमारी संस्कृति के संरक्षक हैं। उनकी कारीगरी ने हमारी विरासत को संजोकर रखा है और तेलंगाना की हथकरघा परंपरा को स्थायी पहचान दिलाई है।" उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि वे हाथ से बुने हुए उत्पादों को चुनकर और बुनकर समुदाय की अथक मेहनत का सम्मान करके हथकरघा क्षेत्र को प्रोत्साहित और समर्थित करें।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हथकरघा बुनकरों और कामगारों को बधाई देते हुए कहा कि हथकरघा एक महान विरासत है, जो दुनिया के सामने भारतीय संस्कृति और परंपराओं की भव्यता को प्रदर्शित करती है।
मुख्यमंत्री रेड्डी ने कहा कि उनकी सरकार हथकरघा बुनकरों और कारीगरों की मेहनत, कला और रचनात्मकता का सम्मान करने, उनकी आजीविका को मजबूत करने और हथकरघा क्षेत्र को और विकसित करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि हथकरघा कारीगरों के कल्याण को बेहतर बनाने, आधुनिक तकनीक के जरिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने, मार्केटिंग के मौकों का विस्तार करने और पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने भी बुनकरों का अभिवादन किया। उन्होंने याद दिलाया कि तेलंगाना के बुनकर, जो करघों से अद्भुत चीजें बनाने की कला में माहिर थे, उन्हें अविभाजित आंध्र प्रदेश में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। कुशल बुनकर दूसरे राज्यों में चले गए थे। उन्होंने दावा किया कि बीआरएस सरकार ही थी, जिसने नई योजनाओं और कई कार्यक्रमों के जरिए बुनकरों को तेलंगाना वापस बुलाया।
के.टी. रामा राव ने कहा कि केसीआर ने 'चेनेथा मित्रा', 'नेथाना कु चेयुथा', 'नेथाना बीमा', बथुकम्मा साड़ियों, लोन माफी और पेंशन जैसी कई योजनाओं के जरिए बुनकरों की जिंदगी में नई जान फूंकी।
उन्होंने कहा कि बीआरएस पार्टी हमेशा बुनकरों के कल्याण और हथकरघा उद्योग के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।
कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भी बुनकरों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, बेहतरीन कारीगरी और आत्मनिर्भरता की भावना को दर्शाती है।
उन्होंने याद दिलाया कि 7 अगस्त 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की भावना को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में बुनकर समुदाय के सम्मान और भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा को बढ़ावा देने के लिए 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' की शुरुआत की थी।
उन्होंने कहा, "आइए, 'विकसित भारत' की ओर बढ़ते हुए हम हथकरघा क्षेत्र को समर्थन देने और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को मजबूत करने के अपने संकल्प को दोहराएं।"
--आईएएनएस
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