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तेलंगाना: 22 अप्रैल से हड़ताल पर जाएंगे सड़क परिवहन निगम के कर्मचारी, 60 लाख से ज्यादा यात्रियों पर पड़ सकता है असर

हैदराबाद, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीएसआरटीसी) के कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में 22 अप्रैल से हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। इसकी घोषणा टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने सोमवार को की।
तेलंगाना: 22 अप्रैल से हड़ताल पर जाएंगे सड़क परिवहन निगम के कर्मचारी, 60 लाख से ज्यादा यात्रियों पर पड़ सकता है असर

हैदराबाद, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीएसआरटीसी) के कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में 22 अप्रैल से हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। इसकी घोषणा टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने सोमवार को की।

जेएसी नेताओं ने कहा कि उन्होंने 13 मार्च को हड़ताल का नोटिस दिया था, लेकिन सरकार या टीजीएसआरटीसी प्रबंधन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने कहा कि सरकार को हड़ताल टालने के लिए कदम उठाने चाहिए।

जेएसी के अध्यक्ष थॉमस रेड्डी ने बताया कि उन्होंने सरकार और प्रबंधन के सामने 32 मांगें रखी हैं।

मुख्य मांगों में आरटीसी का राज्य सरकार में विलय, श्रमिक यूनियनों के चुनाव कराना और सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन व लाभ सुनिश्चित करना शामिल है।

इस हड़ताल से तेलंगाना में सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हो सकता है। 6,000 से अधिक बसों के सड़कों से हटने की संभावना है, जिससे रोजाना राज्य के 60 लाख से ज्यादा यात्रियों पर असर पड़ सकता है।

जेएसी ने यह घोषणा ऐसे समय में की है जब परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने कर्मचारियों से हड़ताल पर न जाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम के सरकार में विलय का मुद्दा एक समिति के विचाराधीन है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार दो लंबित मुद्दों को छोड़कर बाकी सभी मामलों पर चर्चा के लिए तैयार है और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों का समाधान करने का आश्वासन दिया।

मंत्री ने बताया कि लंबित महंगाई भत्ता (डीए) पहले ही जारी किया जा चुका है, जबकि वेतन संशोधन आयोग (पीआरसी) पर सरकार विचार कर रही है।

टीजीएसआरटीसी के कर्मचारी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि सरकार चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों को लागू करे।

जेएसी की मांगों में आरटीसी का राज्य सरकार में लंबे समय से लंबित विलय लागू करना, दो वेतन संशोधन आयोग (पीआरसी) लागू करना, क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी (सीसीएस) और कर्मचारी भविष्य निधि के लंबित बकाया का भुगतान, वेतन संशोधन और लंबित भत्तों का भुगतान शामिल है।

पिछले साल मई में राज्य सरकार द्वारा उनकी मांगों पर विचार करने के आश्वासन के बाद जेएसी ने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल स्थगित कर दी थी। राज्य सरकार ने कर्मचारियों के यूनियनों के साथ बातचीत करने और उनकी मांगों का समाधान करने के लिए तीन सदस्यीय आईएएस समिति गठित करने पर सहमति जताई थी।

जेएसी नेताओं ने सरकार से कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा देने की भी मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार इलेक्ट्रिक बसें खरीदकर आरटीसी को सौंपे।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी

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