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'गृह लक्ष्मी योजना' के बकाया पर तेजस्वी सूर्या का कर्नाटक सरकार पर हमला, 'सर्वर नहीं, सरकार की जेब खाली'

'गृह लक्ष्मी योजना' के बकाया पर तेजस्वी सूर्या का कर्नाटक सरकार पर हमला, 'सर्वर नहीं, सरकार की जेब खाली'
'गृह लक्ष्मी योजना' के बकाया पर तेजस्वी सूर्या का कर्नाटक सरकार पर हमला, 'सर्वर नहीं, सरकार की जेब खाली'

बेंगलुरु, 5 नवंबर (आईएएनएस)। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने गुरुवार को गृह लक्ष्मी योजना के तहत 2025 में दो महीने की किस्तों का भुगतान नहीं होने को लेकर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में सरकार का जवाब विधानसभा में दिए गए उसके पहले के दावे से बिल्कुल उल्टा है।

बेंगलुरु दक्षिण से सांसद सूर्या ने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि दिसंबर 2025 में तत्कालीन महिला एवं बाल कल्याण मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने विधानसभा में गृह लक्ष्मी फंड जारी करने में देरी के लिए तकनीकी गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन नवंबर 2026 में वही सरकार हाईकोर्ट में भुगतान न होने के लिए वित्तीय बाधाओं का हवाला दे रही है।

सूर्या ने लिखा, "दिसंबर 2025 में तत्कालीन मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने विधानसभा में गृह लक्ष्मी के बकाया के लिए तकनीकी गड़बड़ी को दोष दिया था। नवंबर 2026 में उनकी ही सरकार कोर्ट में वित्तीय बाधाओं का हवाला दे रही है, जो उनके बयान से मेल नहीं खाता। सर्वर कभी क्रैश नहीं हुए। राज्य की आर्थिक स्थिति क्रैश हुई। इस बात का और क्या सबूत चाहिए कि यह जीरो-बैलेंस, कंगाल सरकार है?''

तेजस्वी सूर्या ने आर. गंगा और अन्य लोगों की ओर से गृह लक्ष्मी किस्तों के भुगतान न होने को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल आपत्तियों का बयान भी साझा किया। मामले में सरकार के प्रधान सचिव, वित्त विभाग, बेंगलुरु और अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है।

सरकार ने कहा कि फरवरी और मार्च 2025 के लिए गृह लक्ष्मी किस्तें जारी करने के प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे गए थे, लेकिन वित्तीय बाधाओं के कारण अनुदान जारी नहीं हो सका, जिसके चलते उन दो महीनों की सहायता का भुगतान नहीं हो पाया।

सरकार ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता खुद इस योजना के लाभार्थी हैं और उन्होंने करीब 1.24 करोड़ नामांकित लाभार्थियों के हित में जनहित याचिका की तरह कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

योजना के क्रियान्वयन का बचाव करते हुए सरकार ने कहा कि यह गृह लक्ष्मी परिवारों की महिला मुखियाओं को वित्तीय सहायता देकर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शुरू किया गया एक कल्याणकारी कार्यक्रम है। लेकिन उसने तर्क दिया कि इसका क्रियान्वयन प्रशासनिक जरूरतों पर निर्भर करता है और लाभार्थी इस सहायता को कानूनी अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकते।

राज्य सरकार ने यह भी कहा कि किसी कल्याणकारी योजना का होना ही लाभार्थियों को वैध अपेक्षा के सिद्धांत के आधार पर वित्तीय सहायता मांगने का अटूट अधिकार नहीं देता, खासकर जब सरकार वास्तविक वित्तीय बाधाओं के कारण धन जारी नहीं कर पा रही हो।

इन आधारों पर सरकार ने रिट याचिका को खारिज करने की मांग की और तर्क दिया कि कल्याणकारी योजना के तहत वित्तीय सहायता को अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता और न ही सिर्फ न्यायिक हस्तक्षेप से लागू कराया जा सकता है।

यह विवाद 2025 में विधानसभा में हुई गरमागरम बहस की पृष्ठभूमि में आया है, जब भाजपा ने सरकार पर गृह लक्ष्मी के लंबित भुगतान को लेकर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया था।

--आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम

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