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टेक्नोलॉजी-आधारित इनोवेशन भारत के आर्थिक पुनर्जागरण की कुंजी है: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि टेक्नोलॉजी-आधारित इनोवेशन भारत के आर्थिक पुनर्जागरण की कुंजी है, जिसका दायरा अब रिसर्च से आगे बढ़कर उद्योग, स्टार्टअप्स और राष्ट्रीय विकास तक पहुंच चुका है।
टेक्नोलॉजी-आधारित इनोवेशन भारत के आर्थिक पुनर्जागरण की कुंजी है: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि टेक्नोलॉजी-आधारित इनोवेशन भारत के आर्थिक पुनर्जागरण की कुंजी है, जिसका दायरा अब रिसर्च से आगे बढ़कर उद्योग, स्टार्टअप्स और राष्ट्रीय विकास तक पहुंच चुका है।

मंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के ऑडिटोरियम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के 56वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि अब विज्ञान को 'प्रयोगशालाओं से बाजार तक और विचारों से प्रभाव तक' पहुंचाना होगा, जो एक नई नीति दिशा को दर्शाता है, जिसमें रिसर्च को सीधे आर्थिक परिणामों से जोड़ा जा रहा है।

डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निर्णायक बदलाव आया है, जिसे उन नीतिगत फैसलों का समर्थन मिला है जिनके तहत अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोला गया है।

उन्होंने आगे कहा कि इन कदमों से स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे भारत अपने विशाल मानव संसाधन का बेहतर उपयोग कर पा रहा है और वैश्विक इनोवेशन इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

स्पेस सेक्टर के तेजी से विस्तार का जिक्र करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि निजी क्षेत्र के लिए इसे खोलने के कुछ ही वर्षों में भारत में स्टार्टअप-आधारित इनोवेशन में तेजी आई है। सैटेलाइट टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नई क्षमताएं विकसित हो रही हैं, जो आर्थिक विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह की गति अन्य उभरती तकनीकों के क्षेत्रों में भी देखी जा रही है।

उन्होंने कहा कि कोई भी देश उद्योग और निजी क्षेत्र से अलग रहकर विज्ञान में आगे नहीं बढ़ सकता, इसलिए सरकार, अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच गहरा सहयोग जरूरी है।

भारत की वैश्विक वैज्ञानिक स्थिति भी काफी मजबूत हुई है, जहां उच्च स्तर के रिसर्च प्रकाशनों में देश की हिस्सेदारी बढ़ी है, जो गुणवत्ता और प्रभाव दोनों को दर्शाती है।

उन्होंने बताया कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से बढ़ा है, जो एक दशक पहले कुछ सौ तक सीमित था, लेकिन अब यह दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स तक पहुंच चुका है।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि रिसर्च को टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और कमर्शियलाइजेशन के साथ जोड़ना जरूरी है।

वहीं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर ने अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ), आरडीआई फंड और नेशनल क्वांटम मिशन जैसी प्रमुख पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम भारत के विज्ञान और इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

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