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एवाई 2026-27 में पुराने इनकम टैक्स एक्ट के तहत करदाता फाइल कर पाएंगे रिटर्न, नया कानून एक अप्रैल से लागू होगा

नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। भारत में नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 एक अप्रैल, 2026 से लागू हो रहा है, लेकिन करदाता इस साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत ही आईटीआर फाइल कर पाएंगे। यह जानकारी आधिकारियों और एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई।
एवाई 2026-27 में पुराने इनकम टैक्स एक्ट के तहत करदाता फाइल कर पाएंगे रिटर्न, नया कानून एक अप्रैल से लागू होगा

नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। भारत में नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 एक अप्रैल, 2026 से लागू हो रहा है, लेकिन करदाता इस साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत ही आईटीआर फाइल कर पाएंगे। यह जानकारी आधिकारियों और एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई।

एक्सपर्ट्स ने कहा कि सरकार नए इनकम टैक्स एक्ट को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है और इस वजह से करदाता इस साल पुराने कानून के तहत इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल कर पाएंगे।

एक्सपर्ट्स ने आगे बताया कि वित्त वर्ष 26 (एक अप्रैल, 2025-31 मार्च, 2026) के बीच आर्जित की गई आय को असेसमेंट ईयर (एवाई) 2026-27 में मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट के तहत फाइल किया जाएगा। वहीं, नया इनकम टैक्स एक्ट वित्त वर्ष 2026-27 में अर्जित की गई आय पर लागू होगा, जिसका एवाई 2027-28 होगा।

यह नया कानून 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। सरकार का कहना है कि इससे टैक्स सिस्टम को ज्यादा सरल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाया जाएगा। हालांकि टैक्स दरों या स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनका असर नौकरीपेशा लोगों, निवेशकों और व्यवसायियों पर पड़ेगा।

नए नियमों के तहत अब 'फाइनेंशियल ईयर' और 'असेसमेंट ईयर' की जगह सिर्फ एक ही 'टैक्स ईयर' होगा। इससे टैक्स भरने की प्रक्रिया आसान होगी और लोगों को अलग-अलग टर्म समझने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही रिटर्न फाइल करने की समयसीमा भी तय कर दी गई है, जिसमें साधारण आईटीआर के लिए 31 जुलाई, बिजनेस और प्रोफेशन वालों के लिए 31 अगस्त, जबकि ऑडिट वाले मामलों में 31 अक्टूबर तक रिटर्न भरना होगा। खास परिस्थितियों में यह समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ सकती है। इसके अलावा अब टैक्स ईयर खत्म होने के 12 महीने तक संशोधित रिटर्न फाइल किया जा सकेगा।

हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। अब कर्मचारियों को छूट पाने के लिए मकान मालिक और किरायेदार के संबंध की जानकारी देना अनिवार्य होगा। अच्छी बात यह है कि अब मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई के साथ हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु में रहने वाले कर्मचारियों को सैलरी के 50 प्रतिशत तक एचआरए छूट मिलेगी। बाकी शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत ही रहेगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 1 लाख रुपए से ज्यादा किराया देता है, तो उसे मकान मालिक का पैन देना जरूरी होगा।

--आईएएनएस

एबीएस/

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