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टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी पहल, टाटा संस को लिस्टिंग से बचाने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और टीसीई के विलय का रखा प्रस्ताव

टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी पहल, टाटा संस को लिस्टिंग से बचाने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और टीसीई के विलय का रखा प्रस्ताव
टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी पहल, टाटा संस को लिस्टिंग से बचाने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और टीसीई के विलय का रखा प्रस्ताव

मुंबई, 28 सितंबर (आईएएनएस)। टाटा ट्रस्ट्स, जिसके पास टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड (टीएसपीएल) में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, ने कंपनी के रणनीतिक पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (टीईएसएस) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (टीसीई) का टाटा संस में विलय किया जाएगा, जिसका उद्देश्य टाटा संस को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) संबंधी नियामकीय ढांचे से बाहर लाना है, जिसके तहत कंपनी के लिए सूचीबद्ध (लिस्टेड) होना आवश्यक हो सकता है।

टाटा ट्रस्ट्स ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि यह कोई नया मॉडल नहीं है। टाटा संस अपने लगभग 100 वर्षों के इतिहास में करीब 80 वर्षों तक एक ऐसी कंपनी रही है, जिसके पास स्वयं के परिचालन व्यवसाय और परिचालन आय थी। इन्हीं आय स्रोतों के माध्यम से कंपनी अपने नए और उभरते कारोबारों को वित्तपोषित करती रही है।

बयान में कहा गया है कि वर्ष 2004 तक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) भी टाटा संस का एक व्यवसायिक डिवीजन थी, जिसे बाद में अलग कर स्वतंत्र सहायक कंपनी बनाया गया। इसी तरह समूह के अन्य कई परिचालन कारोबार भी पहले टाटा संस का हिस्सा रहे हैं। प्रस्तावित पुनर्गठन के बाद टाटा संस फिर से अपने पुराने परिचालन मॉडल में लौट आएगी, जहां वह होल्डिंग कंपनी होने के साथ-साथ स्वयं का परिचालन व्यवसाय और राजस्व भी रखेगी।

टाटा ट्रस्ट्स का दावा है कि टीईएसएस और टीसीई के विलय के बाद 31 मार्च 2026 की स्थिति के आधार पर संयुक्त इकाई का परिचालन राजस्व 1,05,043 करोड़ रुपए होगा, जो वित्तीय परिसंपत्तियों से होने वाली आय 40,072 करोड़ रुपए से काफी अधिक है। कुल आय में परिचालन आय की हिस्सेदारी 64.3 प्रतिशत होगी। ऐसे में कंपनी एनबीएफसी के लिए निर्धारित 'प्रिंसिपल बिजनेस क्राइटेरिया' को पूरा नहीं करेगी।

इसके अलावा, संयुक्त इकाई की कुल शुद्ध परिसंपत्तियां 2,00,158 करोड़ रुपए होंगी, जबकि समूह कंपनियों में निवेश 1,77,120 करोड़ रुपए होगा, जो कुल शुद्ध परिसंपत्तियों का 90 प्रतिशत से कम है। इस वजह से कंपनी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) की परिभाषा में भी नहीं आएगी।

बयान के अनुसार, किसी एनबीएफसी और गैर-वित्तीय परिचालन कंपनियों के इस प्रकार के विलय को आरबीआई के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां - स्वैच्छिक विलय निर्देश, 2025 के तहत पूरा करना होगा। इसके लिए आरबीआई से पूर्व अनुमति या 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी)' लेना अनिवार्य होगा। पुनर्गठन पूरा होने के बाद टाटा संस को सीआईसी के रूप में मिला पंजीकरण भी वापस करना होगा।

टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि यह प्रस्ताव टाटा समूह और उसके सभी हितधारकों के सर्वोत्तम हित में है तथा नियामकीय रूप से भी पूरी तरह वैध और अनुपालन योग्य है। इसी उद्देश्य से ट्रस्ट्स ने टाटा संस के बोर्ड को पत्र लिखकर प्रस्ताव पर विचार करने और आवश्यक मंजूरी प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।

बयान में कहा गया है कि टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस इस प्रस्तावित पुनर्गठन के सभी पहलुओं पर आरबीआई के साथ चर्चा करेंगे। यह योजना जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के बोर्ड द्वारा पारित सर्वसम्मत प्रस्तावों के अनुरूप है, जिसमें टाटा संस की अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी की स्थिति को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करने पर सहमति बनी थी।

टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि इस पुनर्गठन का एक बड़ा लाभ यह भी होगा कि टाटा समूह की 100 वर्ष से अधिक पुरानी विशिष्ट संगठनात्मक संरचना को संरक्षित रखा जा सकेगा। समूह का यह मॉडल लंबे समय से राष्ट्र निर्माण, दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश और समाज के वंचित वर्गों के कल्याण पर केंद्रित रहा है। इसलिए प्रस्तावित योजना को केवल नियामकीय अनुपालन ही नहीं, बल्कि टाटा समूह की ऐतिहासिक पहचान और मूल दर्शन को बनाए रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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