कावेरी विवाद के बीच तमिलनाडु से कर्नाटक जाने वाली बस सेवाएं अस्थायी रूप से बंद, होसुर सीमा पर सुरक्षा कड़ी
चेन्नई, 26 जुलाई (आईएएनएस)। कावेरी जल विवाद को लेकर कई कन्नड़ संगठनों द्वारा प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर तमिलनाडु से कर्नाटक जाने वाली बस सेवाएं रविवार को होसुर सीमा पर एहतियातन अस्थायी रूप से रोक दी गईं। प्रशासन के इस फैसले से बेंगलुरु और कर्नाटक के अन्य हिस्सों की यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु से चलने वाली राज्य परिवहन निगम की बसों को होसुर बस स्टैंड पर ही रोक दिया गया और कर्नाटक में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, कर्नाटक से तमिलनाडु आने वाली बस सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहीं, जिससे वहां से आने वाले यात्रियों की यात्रा प्रभावित नहीं हुई।
बस सेवाएं बंद होने के कारण कई यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी। होसुर से बेंगलुरु जाने वाले लोग पहले स्थानीय टाउन बसों से तमिलनाडु सीमा तक पहुंचे। वहां से उन्होंने ऑटो-रिक्शा के जरिए कर्नाटक के अत्तीबेले तक सफर किया और फिर वहां से बस या अन्य वाहनों के माध्यम से बेंगलुरु के लिए रवाना हुए।
इस अस्थायी व्यवस्था के कारण यात्रियों को न केवल देरी का सामना करना पड़ा, बल्कि अतिरिक्त यात्रा खर्च भी उठाना पड़ा। हालांकि, निजी कारों, व्यावसायिक वाहनों और मालवाहक ट्रकों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगाई गई। राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात सामान्य रहा, लेकिन सीमा के पास पुलिस की सघन जांच के कारण वाहनों की जांच बढ़ा दी गई।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होसुर-अत्तीबेले सीमा और अन्य संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि कन्नड़ संगठनों के संभावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई है।
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच दशकों पुराने कावेरी जल बंटवारे के विवाद से जुड़ा है, जो समय-समय पर दोनों राज्यों के बीच तनाव की वजह बनता रहा है। हाल के दिनों में यह मुद्दा फिर चर्चा में आया है, क्योंकि कर्नाटक ने कावेरी नदी पर मेकेदातु में बैलेंसिंग रिजर्वायर (संतुलन जलाशय) बनाने का प्रस्ताव रखा है।
तमिलनाडु लगातार इस परियोजना का विरोध करता रहा है। राज्य का कहना है कि मेकेदातु परियोजना से कावेरी नदी के पानी में तमिलनाडु के वैध हिस्से पर असर पड़ सकता है और यह जल बंटवारे से जुड़े मौजूदा कानूनी एवं न्यायाधिकरण के प्रावधानों का उल्लंघन होगा।
तमिलनाडु के किसान संगठनों ने भी इस प्रस्तावित परियोजना के खिलाफ कई बार प्रदर्शन किया है। उनका कहना है कि इससे राज्य में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। अंतरराज्यीय सीमा पर सुरक्षा हाई अलर्ट पर रखी गई है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और आवश्यक सेवाओं पर किसी तरह का अतिरिक्त असर न पड़े।
--आईएएनएस
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