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तमिलनाडु में किसके सिर सजेगा जीत का ताज? फैसले का काउंटडाउन शुरू

चेन्नई, 3 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है, क्योंकि 2026 विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती सोमवार से शुरू होगी। सत्ताधारी डीएमके एक और कार्यकाल के लिए प्रयासरत है, एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, और अभिनेता-राजनेता विजय की तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) राज्य के द्रविड़ राजनीतिक परिदृश्य में सबसे बड़ा नया बदलाव बनकर उभरी है।
तमिलनाडु में किसके सिर सजेगा जीत का ताज? फैसले का काउंटडाउन शुरू

चेन्नई, 3 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है, क्योंकि 2026 विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती सोमवार से शुरू होगी। सत्ताधारी डीएमके एक और कार्यकाल के लिए प्रयासरत है, एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, और अभिनेता-राजनेता विजय की तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) राज्य के द्रविड़ राजनीतिक परिदृश्य में सबसे बड़ा नया बदलाव बनकर उभरी है।

अभिनेता-राजनेता सीमान के नेतृत्व वाली नाम तमिलर काची (एनटीके) भी मैदान में है, जिससे राज्य में चार-तरफा मुकाबला कड़ा हो गया है।

सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतदान 23 अप्रैल को हुआ था, और चुनाव आयोग ने पुष्टि की है कि 4.88 करोड़ मतदाताओं ने अपने मत डाले। मतगणना 4 मई को होगी।

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के लिए यह चुनाव इस बात की परीक्षा है कि क्या डीएमके का कल्याणकारी शासन मॉडल, सामाजिक न्याय का मुद्दा और गठबंधन प्रबंधन सत्ता-विरोधी लहर का सामना कर पाएगा।

डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने आत्मविश्वास जताया है और तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थागई का दावा है कि गठबंधन 200 सीटों का आंकड़ा पार कर सकता है।

एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके ने भाजपा, पीएमके और एएमएमके के साथ गठबंधन करके डीएमके विरोधी वोटों को एकजुट करने का प्रयास किया है।

हालांकि, गठबंधन में भाजपा की मौजूदगी ने वैचारिक रूप से मुकाबले को और भी तीखा बना दिया है, खासकर ऐसे राज्य में जहां द्रविड़ राजनीति पारंपरिक रूप से भाजपा के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का विरोध करती रही है।

सबसे अप्रत्याशित कारक विजय की टीवीके पार्टी है। कई एग्जिट पोल ने पार्टी के मजबूत प्रदर्शन का संकेत दिया है; एक अनुमान के अनुसार टीवीके को आश्चर्यजनक रूप से अधिक सीटें मिल सकती हैं, जबकि अधिकांश पोल डीएमके को आगे बता रहे हैं।

विजय ने अपनी पार्टी को डीएमके के राजनीतिक और भाजपा के वैचारिक विरोधी के रूप में पेश किया है, जिससे वे खंडित जनादेश की स्थिति में किंगमेकर बन सकते हैं।

इस चुनाव ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी प्रमुखता से उजागर किया है। पार्टी कार्यालयों को निशाना बनाकर की गई घटनाओं के बाद टीवीके ने मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाने का आग्रह किया है, वहीं अधिकारियों ने सभी मतगणना स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कर ली है।

डीएमके की स्पष्ट जीत स्टालिन के नेतृत्व को मजबूत करेगी और सत्ताधारी गठबंधन के प्रभुत्व को और पुख्ता करेगी। एआईएडीएमके के नेतृत्व में सत्ता में वापसी से पलानीस्वामी का रुतबा फिर से बढ़ेगा और उनकी गठबंधन रणनीति को वैधता मिलेगी। सत्ता में न होने पर भी टीवीके का दमदार प्रदर्शन 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीतिक संरचना को नया रूप दे सकता है।

तमिलनाडु सोमवार के फैसले का इंतजार कर रहा है, ऐसे में केंद्रीय प्रश्न केवल यह नहीं है कि सरकार कौन बनाएगा, बल्कि यह है कि क्या राज्य की लंबे समय से चली आ रही द्रविड़ राजनीतिक संरचना को फिर से लिखा जाने वाला है।

--आईएएनएस

एमएस/

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