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ताइवान के राष्ट्रपति की एस्वातिनी यात्रा रद्द, कई देशों ने उड़ान अनुमति वापस ली

ताइपे, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते की अफ्रीकी देश एस्वातिनी की यात्रा रद्द हो गई है, क्योंकि कई देशों ने उनके विमान के लिए ओवरफ्लाइट (अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने) की अनुमति वापस ले ली।
ताइवान के राष्ट्रपति की एस्वातिनी यात्रा रद्द, कई देशों ने उड़ान अनुमति वापस ली

ताइपे, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते की अफ्रीकी देश एस्वातिनी की यात्रा रद्द हो गई है, क्योंकि कई देशों ने उनके विमान के लिए ओवरफ्लाइट (अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने) की अनुमति वापस ले ली।

राष्ट्रपति कार्यालय के महासचिव पैन मेन-एन ने मंगलवार को बताया कि सेशेल्स, मॉरीशस और मेडागास्कर ने अचानक और बिना किसी वजह उस चार्टर्ड विमान की ओवरफ्लाइट अनुमति रद्द कर दी, जिसमें राष्ट्रपति लाई, उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम और मीडिया के लोग जाने वाले थे। यह जानकारी सेंट्रल न्यूज एजेंसी की फोकस ताइवान रिपोर्ट में दी गई।

पैन ने इस कदम को अभूतपूर्व बताया और कहा कि इसके पीछे चीन का आर्थिक दबाव है।

राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने सोशल मीड‍िया अकाउंट एक्‍स पर लिखा, “चीन की दबाव वाली कार्रवाई मौजूदा हालात को कमजोर करती है और एक बार फिर दिखाती है कि सत्तावादी शासन अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए कितना जोखिम पैदा करते हैं। एस्वातिनी की मेरी यात्रा से पहले, हमारे फ्लाइट रूट पर आने वाले कई देशों ने चीन के दबाव में अचानक ओवरफ्लाइट अनुमति रद्द कर दी।”

डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के प्रमुख ने कहा कि किसी भी तरह की धमकी या दबाव ताइवान के दुनिया से जुड़ने के इरादे को नहीं डिगा सकता और न ही उसकी वैश्विक योगदान को कम कर सकता है।

उन्होंने आगे कहा क‍ि दुनिया भर में समान सोच वाले देशों के साथ दोस्ती बनाने का हमारा इरादा बाहरी दबाव के बावजूद मजबूत बना रहेगा।

लाई चिंग-ते 24 से 26 अप्रैल के बीच एस्वातिनी जाने वाले थे। राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, यह यात्रा राजा मस्वाती तृतीय के सिंहासन पर बैठने के 40 साल पूरे होने और उनके 58वें जन्मदिन के मौके पर तय की गई थी।

राष्ट्रपति कार्यालय ने यह भी बताया कि राजा मस्वाती तृतीय ने खुद हस्ताक्षर करके लाई को इस खास समारोह में आने का निमंत्रण दिया था। साथ ही यह भी याद दिलाया गया कि राजा 2024 में ताइवान आए थे, जब 16वें कार्यकाल के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का शपथ ग्रहण हुआ था।

इस यात्रा के तीन मुख्य उद्देश्य थे सुरक्षा में साझी तरक्की, आर्थिक विकास में सहयोग, और डिजिटल टेक्नोलॉजी में प्रगति। इसी वजह से इस यात्रा का नाम रखा गया था, “साथ मिलकर जश्न, साथ मिलकर तरक्की।”

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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