भारत की कमर्शियल और इंडस्ट्रियल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 2032 तक तीन गुना बढ़कर 100 गीगावाट होने की उम्मीद : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। भारत की कमर्शियल और इंडस्ट्रियल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 2032 तक बढ़कर 100 गीगावाट हो सकती है, जो कि 2025 में 32 गीगावाट है। साथ ही स्थापित एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की क्षमता 10 गुना से अधिक बढ़कर 31 गीगावाट-घंटा होने की उम्मीद है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस और कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस की रिपोर्ट में इस तेज वृद्धि का श्रेय कंपनियों के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों, आसमान छूते ग्रिड टैरिफ और ऊर्जा लचीलेपन की बढ़ती आवश्यकता को दिया गया है, जिसमें राज्य-स्तरीय नियामक इनोवेशन स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की गति को तेज कर रहा है।
यह रिपोर्ट नई दिल्ली के यशोभूमि (आईआईसीसी) में 8-10 जुलाई को होने वाले 'इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक'(आईईएसडब्ल्यू) 2026 में जारी की जाएगी। इसमें 200 से अधिक प्रदर्शक और 10,000 से अधिक इंडस्ट्री लीडर्स शामिल होंगे। यह इवेंट क्लीन एनर्जी वैल्यू चेन में पॉलिसी पर चर्चा, टेक्निकल जानकारी के आदान-प्रदान और इनोवेशन को दिखाने के लिए एक बेहतरीन मंच होगा।
आईईएसडब्ल्यू 2026 में भारी उद्योग, खान, बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स और पर्यावरण जैसे अहम मंत्रालयों के सीनियर अधिकारी, राज्यों के प्रतिनिधियों और रेगुलेटरी बॉडीज के साथ मिलकर खुली बातचीत करेंगे।
प्रेस रिलीज के अनुसार, इस इवेंट में पॉलिसी से जुड़ी रुकावटों, राज्य-स्तर के सुधारों और इंडस्ट्री की जरूरतों पर खुलकर चर्चा होगी। इसका मकसद भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन (स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव) को तेजी देने के लिए ऐसे समाधान निकालना है जिन्हें असल में लागू किया जा सके।
आईईएसडब्ल्यू के अध्यक्ष देबमाल्य सेन ने कहा, "हमारी नई रिसर्च से पता चलता है कि भारत का सीएंडआई (कमर्शियल और इंडस्ट्रियल) एनर्जी स्टोरेज मार्केट न सिर्फ बढ़ रहा है, बल्कि एक नए दौर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। राज्यों की दूरदर्शी नीतियों और कॉर्पोरेट जगत से बढ़ती मांग के कारण, स्टोरेज अब सिर्फ बैकअप नहीं, बल्कि मजबूती और डीकार्बोनाइजेशन के लिए एक अहम रणनीतिक टूल बनता जा रहा है। अभी जो तेजी दिख रही है, वही अगले दशक में इस सेक्टर की दिशा तय करेगी।"
रिपोर्ट में महाराष्ट्र की नई रिन्यूएबल एनर्जी और स्टोरेज पॉलिसी पर जोर दिया गया है, जिसके तहत 100 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले हर नए रिन्यूएबल प्रोजेक्ट के लिए स्टोरेज की सुविधा जरूरी है। इस पॉलिसी के अनुसार, डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों को भी वित्त वर्ष 2035–36 तक अपनी कुल बिजली का 10 प्रतिशत हिस्सा स्टोरेज से हासिल करना होगा।
गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान भी कॉस्ट-रिफ्लेक्टिव बैंकिंग, सेटलमेंट पॉलिसी और ट्रांसमिशन चार्ज में छूट जैसे उपायों के जरिए इसे तेजी से अपनाने में मदद कर रहे हैं।
स्टोरेज तकनीक को अपनाने में इंडस्ट्रियल यूनिट्स सबसे आगे रहेंगी और कुल ईएसएस इंस्टॉलेशन में इनकी हिस्सेदारी आधे से अधिक होगी। वहीं, डेटा सेंटर और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे कि हॉस्पिटल, मेट्रो और रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट में इसकी सबसे तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
--आईएएनएस
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