हमने विरोध प्रदर्शन करने वाले सरकारी कर्मचारियों को कभी जेल नहीं भेजा: स्टालिन
चेन्नई, 22 जनवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को सरकारी कर्मचारियों और उनके विरोध आंदोलनों के प्रति डीएमके सरकार के रुख का जोरदार बचाव किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी भी आंदोलनकारियों को जेल नहीं भेजा और न ही उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं।
विधानसभा सत्र के तीसरे दिन की शुरुआत मंत्रियों द्वारा सदस्यों के प्रश्नों के उत्तर देने से हुई। इस दौरान स्टालिन ने एआईएडीएमके सदस्य द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में अपनी सरकार के रुख पर प्रकाश डाला।
स्टालिन ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी सरकार ने विरोध प्रदर्शन कर रहे सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कभी भी कठोर कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने कहा कि हमने विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले सरकारी कर्मचारियों को जेल नहीं भेजा। हमने उनके खिलाफ तमिलनाडु आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (टीईएसएमए) जैसे कठोर कानूनों का प्रयोग नहीं किया।
पूर्व (एआईएडीएमके) शासन से तुलना करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एआईएडीएमके सरकार के कार्यकाल में शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार कर रात भर हिरासत में रखा गया था।
बीती घटनाओं का हवाला देते हुए स्टालिन ने याद दिलाया कि एआईएडीएमके प्रशासन के दौरान विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए कई सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
उन्होंने एआईएडीएमके महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी की भी आलोचना करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन के बारे में उनकी अपमानजनक टिप्पणियां आज भी कई लोगों को याद हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों ने सुनिश्चित पेंशन योजना की घोषणा का स्वागत किया है और इसे एक लंबे समय से चली आ रही मांग की पूर्ति बताया है।
उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों की यह 23 साल पुरानी मांग थी, और हमारी सरकार ने इसे पूरा किया। इसीलिए वे सचिवालय स्थित मेरे कार्यालय में आए और मिठाई भेंट की।
स्टालिन ने आगे आरोप लगाया कि कल्याणकारी उपायों के लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों की खुशी से एआईएडीएमके असहज महसूस कर रही है।
--आईएएनएस
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