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कोलाथुर में स्टालिन की हार, जयललिता के बाद चुनाव हारने वाले दूसरे मौजूदा मुख्यमंत्री बने

चेन्नई, 4 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन सोमवार को राज्य के इतिहास में जे जयललिता के बाद दूसरे ऐसे मौजूदा मुख्यमंत्री बन गए, जिन्हें विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
कोलाथुर में स्टालिन की हार, जयललिता के बाद चुनाव हारने वाले दूसरे मौजूदा मुख्यमंत्री बने

चेन्नई, 4 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन सोमवार को राज्य के इतिहास में जे जयललिता के बाद दूसरे ऐसे मौजूदा मुख्यमंत्री बन गए, जिन्हें विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

स्टालिन को तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) के वीएस बाबू ने हराया। बाबू पहले डीएमके के पदाधिकारी थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी राजनीतिक निष्ठा बदल ली थी। इस अप्रत्याशित हार को 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के सबसे महत्वपूर्ण नतीजों में से एक माना जा रहा है। यह बदलती हुई राजनीतिक तस्वीर और टीवीके के एक बड़ी ताकत के रूप में उभरने का संकेत है।

इससे पहले ऐसा ही एक वाकया 1996 में हुआ था, जब बरगुर विधानसभा क्षेत्र में डीएमके के ईजी सुगावनम ने जयललिता को हरा दिया था।

इस तरह स्टालिन की हार ने दशकों पुराने ट्रेंड को तोड़ दिया है, जिसमें तमिलनाडु में मौजूदा मुख्यमंत्री आमतौर पर अपनी सीटें बचा लेते थे। स्टालिन का चुनावी करियर चार दशकों से ज्यादा का है, जिसमें नाकामियां और बड़ी सफलताएं दोनों शामिल हैं। उन्होंने 1984 में थाउजेंड लाइट्स से डेब्यू किया था, लेकिन अपना पहला चुनाव हार गए।

उन्होंने 1989 में उसी चुनाव क्षेत्र से अपनी पहली जीत हासिल की, जिसके बाद 1991 में उन्हें एक और हार का सामना करना पड़ा। बाद में उन्होंने 1996 और 2006 के बीच थाउजेंड लाइट्स से लगातार तीन जीत के साथ अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की।

चुनाव क्षेत्रों के नए सिरे से सीमांकन के बाद, 2011 में स्टालिन कोलाथुर चले गए और 2011, 2016 और 2021 में लगातार इस सीट पर जीत हासिल की। इस लगातार जीत के रिकॉर्ड के बावजूद, 2026 में उनकी हार राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। चुनावी राजनीति से परे, स्टालिन ने कई अहम प्रशासनिक पदों पर भी काम किया है।

1996 में उन्होंने चेन्नई के पहले सीधे तौर पर चुने गए मेयर के रूप में कार्यभार संभाला और शहर को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 'सिंगारा चेन्नई' पहल की शुरुआत की। बाद में 2006 में उन्होंने ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन विभागों की जिम्मेदारी संभाली।

2018 में अपने पिता एम करुणानिधि के निधन के बाद, स्टालिन ने द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) की कमान संभाली और 2021 में पार्टी को फिर से सत्ता में लाकर मुख्यमंत्री बने।

यह बात खास तौर पर गौर करने लायक है कि करुणानिधि का चुनावी रिकॉर्ड बेमिसाल रहा था। उन्होंने कई दशकों तक जितने भी चुनाव लड़े, उन सभी में जीत हासिल की। ​​इसी वजह से स्टालिन की हार डीएमके के राजनीतिक इतिहास में एक बेहद अहम घटना मानी जा रही है।

--आईएएनएस

पीएसके

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