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स्पेन के प्रधानमंत्री ने की अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना

मैड्रिड, 25 मार्च (आईएएनएस)। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने पूरे मध्य पूर्व में फैल चुके युद्ध के प्रति अपना विरोध दोहराया। सांचेज ने इस संदर्भ में अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना की।
स्पेन के प्रधानमंत्री ने की अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना

मैड्रिड, 25 मार्च (आईएएनएस)। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने पूरे मध्य पूर्व में फैल चुके युद्ध के प्रत‍ि अपना विरोध दोहराया। सांचेज ने इस संदर्भ में अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना की।

स्पेन के प्रधानमंत्री ने इस संघर्ष के प्रभाव को कम करने के लिए अपनी सरकार के आर्थिक पैकेज का भी बचाव किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाली सैन्य कार्रवाइयों का समर्थन नहीं करेगा।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, "स्पेन न तो अवैध आक्रामकता में भागीदार बनेगा और न ही आजादी की आड़ में बोले गए झूठ में, कम से कम तब तक तो बिल्कुल नहीं, जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं।"

सहयोगी देशों के साथ संबंधों पर बोलते हुए सांचेज ने स्वतंत्र और आलोचनात्मक रुख की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सहयोगी होने का मतलब आंख मूंदकर आज्ञापालन करना नहीं है, बल्कि जब रास्ता गलत हो तो खड़े होने का साहस दिखाना और अपने सहयोगियों को सच बताना है।

सांचेज ने यह भी चेतावनी दी कि यह संघर्ष क्षेत्र में और फैल सकता है। उन्होंने कहा कि इजरायल की सैन्य कार्रवाइयां लेबनान में “गाजा जैसी तबाही और पीड़ा” को दोहरा सकती हैं।

संघर्ष को समाप्त करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, "आज स्पेन शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा के मामले में एक मिसाल है।"

उन्होंने कहा, "हम यह मांग करेंगे कि यह युद्ध बंद हो। यह बिल्कुल भी उचित नहीं है कि कुछ लोग तो दुनिया में आग लगा दें और बाकी हम सब उस आग की राख को निगलने के लिए मजबूर हो जाएं।"

आर्थिक मोर्चे पर सांचेज ने पांच अरब यूरो से अधिक के एंटी-क्राइसिस पैकेज का बचाव किया और चेतावनी दी कि युद्ध का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।

सांचेज ने कहा, “यह युद्ध एक बहुत बड़ी गलती है, जिसकी कीमत हम न तो स्वीकार करते हैं और न ही चुकाने को तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि इसके परिणाम न तो अधिक वेतन में बदलेंगे और न ही सस्ते आवास में और यही “वास्तविक त्रासदी” है।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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