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दक्षिण कोरिया ने जापान के साथ एसीएसए रक्षा समझौते पर विचार से किया इनकार

सोल, 8 मई (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि देश, जापान के साथ किसी 'अधिग्रहण और क्रॉस-सर्विसिंग समझौते' (एसीएसए) पर हस्ताक्षर करने पर विचार नहीं कर रहा है। यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि टोक्यो इस तरह के समझौते को आगे बढ़ाना चाहता है।
दक्षिण कोरिया ने जापान के साथ एसीएसए रक्षा समझौते पर विचार से किया इनकार

सोल, 8 मई (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि देश, जापान के साथ किसी 'अधिग्रहण और क्रॉस-सर्विसिंग समझौते' (एसीएसए) पर हस्ताक्षर करने पर विचार नहीं कर रहा है। यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि टोक्यो इस तरह के समझौते को आगे बढ़ाना चाहता है।

जापान का उद्देश्य है कि भविष्य की बातचीत में दक्षिण कोरिया के साथ इस तरह के समझौते में प्रगति की जाए। यह बातचीत उस 'टू प्लस टू' सुरक्षा बैठक के बाद आगे बढ़ सकती है, जो गुरुवार को सोल में दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रालयों के उप मंत्रियों के बीच हुई थी।

जापानी अखबार 'योमिउरी शिंबुन' के अनुसार यह जानकारी सामने आई है।

एसीएसए एक ऐसा द्विपक्षीय समझौता है, जो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच होता है, ताकि किसी संकट या युद्ध जैसी स्थिति में भोजन, ईंधन और परिवहन जैसी लॉजिस्टिक सुविधाएं आसानी से साझा की जा सकें।

योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने बताया, “हम दक्षिण कोरिया और जापान के बीच एसीएसए पर हस्ताक्षर करने पर विचार नहीं कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा क‍ि दक्षिण कोरिया सरकार जापान के साथ रक्षा क्षेत्र में स्थिर और भविष्य-उन्मुख सहयोग और आदान-प्रदान को जारी रखेगी, जो आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित होगा।

टोक्यो चाहता है कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच समझौता हो, जिससे रक्षा सहयोग और मजबूत हो सके। साथ ही यह अमेरिका के साथ मिलकर त्रिपक्षीय सहयोग को भी बढ़ावा देगा, क्योंकि अमेरिका दोनों देशों का साझा सहयोगी है।

जापान का मानना है कि ऐसा समझौता उत्तर कोरिया के खतरे और संभावित सैन्य उकसावे के खिलाफ मजबूत रोकथाम में मदद करेगा, और साथ ही चीन से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं में भी उपयोगी होगा। लेकिन, सोल इस मुद्दे को लेकर सावधानी बरत रहा है। उसकी चिंता है कि इससे जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज को कोरियाई प्रायद्वीप पर किसी तरह की सैन्य गतिविधि में शामिल होने का रास्ता मिल सकता है।

इसके अलावा, जापान के 1910 से 1945 तक कोरिया पर औपनिवेशिक शासन के दौरान हुए युद्धकालीन इतिहास से जुड़े मुद्दे भी इस सावधानी की एक बड़ी वजह हैं।

गुरुवार को हुई 'टू प्लस टू' सुरक्षा वार्ता इस तरह की पहली उच्च-स्तरीय बैठक थी, जिसे 1998 में शुरू हुई निदेशक-जनरल स्तर की बातचीत से ऊपर उठाया गया है।

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद कहा कि दोनों देशों ने आगे भी सहयोग और समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई है और माना है कि द्विपक्षीय सहयोग और अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय साझेदारी अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

इसके अलावा, सोल और टोक्यो इस बात पर भी चर्चा कर रहे हैं कि जापान के प्रधानमंत्री साने ताकाइची मई के मध्य में दक्षिण कोरिया का दौरा करें और राष्ट्रपति ली के साथ शिखर वार्ता करें।

साथ ही, जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के जून में सियोल आने की भी संभावना पर दोनों देश बातचीत कर रहे हैं।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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