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भारत में डिजिटल निवेशकों की 80 प्रतिशत संपत्ति एसआईपी और शेयरों में निवेशित: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। भारत में एक औसत डिजिटल निवेशक के पोर्टफोलियो का आकार लगभग 10 लाख रुपए है और वह हर साल करीब 3 लाख रुपए का नया निवेश जोड़ता है। इसके बावजूद, उसकी निवेश योग्य डिजिटल संपत्ति का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अभी भी एसआईपी, सीधे शेयरों (डायरेक्ट इक्विटी) और एकमुश्त म्यूचुअल फंड निवेशों में केंद्रित है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई।
भारत में डिजिटल निवेशकों की 80 प्रतिशत संपत्ति एसआईपी और शेयरों में निवेशित: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। भारत में एक औसत डिजिटल निवेशक के पोर्टफोलियो का आकार लगभग 10 लाख रुपए है और वह हर साल करीब 3 लाख रुपए का नया निवेश जोड़ता है। इसके बावजूद, उसकी निवेश योग्य डिजिटल संपत्ति का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अभी भी एसआईपी, सीधे शेयरों (डायरेक्ट इक्विटी) और एकमुश्त म्यूचुअल फंड निवेशों में केंद्रित है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई।

कंसल्टिंग फर्म रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार, कुल निवेश में एसआईपी की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत और डायरेक्ट इक्विटी की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत है। इससे पता चलता है कि निवेशकों की संपत्ति तो बढ़ रही है, लेकिन नए निवेश उत्पादों को अपनाने की रफ्तार उतनी तेज नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल निवेश के अगले चरण की वृद्धि नए निवेशकों को जोड़ने से ज्यादा मौजूदा निवेशकों के व्यवहार पर निर्भर करेगी।

ईटीएफ, वैश्विक शेयरों (ग्लोबल इक्विटीज), मार्जिन ट्रेडिंग सुविधा और शेयरों के बदले ऋण (लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज) जैसे उत्पादों के बारे में निवेशकों में अच्छी जागरूकता है, लेकिन उनका वास्तविक उपयोग अभी भी सीमित है।

रिपोर्ट में बाजार को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख निवेशक वर्गों की पहचान की गई है। पहला वर्ग "गाइडेड सेवर्स" का है, जो निवेश को लंबी अवधि की बचत का माध्यम मानते हैं। दूसरा वर्ग "एस्पायरिंग इन्वेस्टर्स" का है, जो धीरे-धीरे निवेश के दायरे को बढ़ा रहे हैं, और तीसरा वर्ग "कॉन्फिडेंट बिल्डर्स" का है, जो अपने निवेश को विभिन्न परिसंपत्तियों में बांटते हैं और बाजार के अवसरों का फायदा उठाते हैं।

रेडसीर स्ट्रेटेजी कंसल्टेंट्स के पार्टनर मृगांक गुटगुटिया ने कहा कि आज निवेश प्लेटफॉर्म्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों को अधिक व्यापक निवेश विकल्पों को समझने और उनमें विश्वास के साथ निवेश करने में मदद करना है।

उन्होंने कहा कि जो प्लेटफॉर्म सही समय पर सही अवसरों की जानकारी देंगे, निवेश निर्णयों को आसान बनाएंगे और भरोसा कायम करेंगे, वे भविष्य में अधिक एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) हासिल कर सकेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की डिजिटल निवेश यात्रा का अगला अध्याय उन प्लेटफॉर्म्स द्वारा लिखा जाएगा जो निवेशकों की निष्क्रिय भागीदारी को गहरी वित्तीय भागीदारी में बदलने में सफल होंगे।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एक प्रमुख निवेश प्लेटफॉर्म अकेले सक्रिय उपयोग का लगभग आधा हिस्सा नियंत्रित करता है, जबकि बाजार में कई अन्य प्लेटफॉर्म भी मौजूद हैं।

करीब दो-तिहाई निवेशकों ने कहा कि वे शून्य ब्रोकरेज मिलने पर भी अपना प्लेटफॉर्म बदलने को तैयार नहीं हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अब कीमत या ब्रोकरेज शुल्क निवेशकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण नहीं रह गया है।

निवेशक आसान और उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस, भरोसेमंद लेन-देन, एक ही जगह पर पूरे पोर्टफोलियो की जानकारी और मजबूत ब्रांड विश्वसनीयता को अधिक महत्व दे रहे हैं। इन मानकों पर अग्रणी प्लेटफॉर्म अपने प्रतिस्पर्धियों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

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