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सिक्किम: एसडीएफ ने शहरी निकाय चुनाव के बहिष्कार का किया ऐलान, आरक्षण व्यवस्था पर उठाए सवाल

गंगटोक, 27 मार्च (आईएएनएस)। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने आगामी शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) चुनावों के बहिष्कार का ऐलान किया है। पार्टी ने सीट आरक्षण मैट्रिक्स को “अनुचित, असंवैधानिक और अप्रमाणित जनगणना पर आधारित” बताते हुए चुनाव से दूरी बनाने का फैसला लिया है।
सिक्किम: एसडीएफ ने शहरी निकाय चुनाव के बहिष्कार का किया ऐलान, आरक्षण व्यवस्था पर उठाए सवाल

गंगटोक, 27 मार्च (आईएएनएस)। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने आगामी शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) चुनावों के बहिष्कार का ऐलान किया है। पार्टी ने सीट आरक्षण मैट्रिक्स को “अनुचित, असंवैधानिक और अप्रमाणित जनगणना पर आधारित” बताते हुए चुनाव से दूरी बनाने का फैसला लिया है।

पार्टी के उपाध्यक्ष कृष्ण खरेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जब तक सभी समुदायों को “न्यायसंगत और अनुपातिक प्रतिनिधित्व” सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक पार्टी चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी।

खरेल ने राज्य सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें प्रेम सिंह तमांग ने विधानसभा सत्र के दौरान 2022 में जनगणना कराए जाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि इस कथित जनगणना का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड या अधिसूचना उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कहा, “हमारी जानकारी के अनुसार, केवल 2011 की राष्ट्रीय जनगणना ही वैध है और आरक्षण उसी के आधार पर होना चाहिए।” खरेल ने यह भी आरोप लगाया कि किसी अप्रकाशित सर्वे पर आधारित आरक्षण अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, जो कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है।

आरक्षण में असमानता का आरोप लगाते हुए खरेल ने कहा कि गुरूंग समुदाय को पूरे राज्य में केवल एक सीट, लिम्बू समुदाय को दो आरक्षित और एक अनारक्षित सीट, जबकि तमांग समुदाय को आठ आरक्षित सीटें दी गई हैं।

उन्होंने दावा किया कि पहले के आंकड़ों के अनुसार केंद्रीय ओबीसी को करीब 17 सीटें मिलनी चाहिए थीं, लेकिन केवल 8 दी गईं, जबकि राज्य ओबीसी को 14-15 सीटों के बजाय 11 सीटें दी गई हैं।

खरेल ने 2022 की इस प्रक्रिया को “पार्टी-प्रेरित और बिना घोषणा की जनगणना” करार देते हुए कहा कि आरक्षण तय करने से पहले न तो सभी दलों से परामर्श किया गया और न ही आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित की गई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयोग को आपत्तियां सौंपने के बावजूद पार्टी को कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। साथ ही, चुनाव की तारीखों को आरक्षण अधिसूचना के कुछ ही दिनों बाद घोषित करने पर भी सवाल उठाए, जिससे हितधारकों को प्रतिक्रिया देने का पर्याप्त समय नहीं मिला।

वहीं, मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आरक्षण प्रक्रिया कैबिनेट से मंजूर 2022 की जनगणना पर आधारित है और सीटों का आवंटन जनसंख्या के अनुरूप किया गया है।

--आईएएनएस

डीएससी

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