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मतदाता सूची में कमी होगी तो जिम्मेदारी मेरी, सही करने का श्रेय बीएलओ का है : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

मतदाता सूची में कमी होगी तो जिम्मेदारी मेरी, सही करने का श्रेय बीएलओ का है : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
मतदाता सूची में कमी होगी तो जिम्मेदारी मेरी, सही करने का श्रेय बीएलओ का है : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

अहमदाबाद, 11 सितंबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की कमी की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के प्रमुख होने के नाते उनकी होगी, लेकिन मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने का श्रेय बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को जाता है।

गुजरात विश्वविद्यालय के अटल कलाम हॉल में आयोजित 'बूथ लेवल अधिकारियों के साथ संवाद' कार्यक्रम में बीएलओ को संबोधित करते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा, "अगर मतदाता सूची में कोई कमी रहती है तो परिवार के मुखिया के नाते इसकी जिम्मेदारी मेरी है, लेकिन सूची को सही और सटीक बनाने का श्रेय हमारे बीएलओ भाई-बहनों को जाता है।"

उन्होंने बीएलओ को चुनाव आयोग परिवार का सबसे महत्वपूर्ण सदस्य बताते हुए कहा कि किसी मतदाता के लिए उसके घर आने वाला या फोन पर संपर्क करने वाला अधिकारी ही चुनाव आयोग की वास्तविक पहचान है।

उन्होंने कहा कि बीएलओ देशभर के करोड़ों मतदाताओं तक पहुंचने, उनके पंजीकरण, मतदाता सूची में सुधार और मतदान में भागीदारी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। देशभर में 11 लाख से अधिक बीएलओ करीब 90 करोड़ मतदाताओं के अधिकारों और अपेक्षाओं से जुड़े चुनावी कार्य में लगे हुए हैं। चुनाव आयोग प्रशिक्षण कार्यक्रमों, बैठकों और ईसीआई-नेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने जमीनी स्तर के कर्मचारियों से लगातार संपर्क बनाए रखता है।

ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची को सटीक बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल और उनके बूथ लेवल एजेंट सत्यापन प्रक्रिया में भाग लेते हैं, जबकि बीएलओ अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और विदेशी मतदाताओं की पहचान करते हैं।

उन्होंने कहा, "हर वह भारतीय नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष पूरी हो चुकी है, उसका नाम मतदाता सूची में शामिल होना चाहिए।"

उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोग समय-समय पर मतदाता सूची की शुद्धता और सटीकता बनाए रखने के लिए पुनरीक्षण करता है। बीएलओ मतदाताओं के घर जाकर सीधे संपर्क स्थापित करते हैं और जरूरी जानकारी का सत्यापन करते हैं। दस्तावेजों की जांच, मैपिंग और सुनवाई जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से सूची को अधिक सटीक बनाया जाता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बीएलओ से अपने क्षेत्रों की मतदाता सूची नियमित रूप से जांचने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा, "जब भी समय मिले, अपने क्षेत्र की मतदाता सूची की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के नाम सूची में जोड़े जाएं। यह देश के लोकतंत्र की सबसे बड़ी सेवा है।"

मतदान और मतगणना प्रक्रिया में सुरक्षा उपायों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि मतदान शुरू होने से पहले उम्मीदवारों के मतदान एजेंटों की मौजूदगी में ईवीएम और वीवीपैट का मॉक पोल के जरिए परीक्षण किया जाता है। मतदान के बाद ईवीएम से संबंधित परिणाम प्रक्रिया उम्मीदवारों के एजेंटों की उपस्थिति में पूरी की जाती है और आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि मतगणना के दौरान ईवीएम में दर्ज मतों का मिलान उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंटों की मौजूदगी में फॉर्म 17सी में दर्ज मतों से किया जाता है। चुनावी प्रक्रिया के हर चरण में राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके एजेंटों को सत्यापन का अवसर मिलता है, जिससे पूरी प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी बनती है।

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल अपने विशाल आकार के कारण ही नहीं, बल्कि उसकी गहराई, विविधता और जीवंतता के कारण भी अनोखा है। मतदाता जागरूकता और चुनाव कर्मियों के प्रयासों ने लोकतंत्र को मजबूत करने में मदद की है।

गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संदीप सागले ने कार्यक्रम में ज्ञानेश कुमार का स्वागत करते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च चुनाव अधिकारी और बूथ लेवल अधिकारियों के बीच सीधा संवाद एक "स्वर्णिम अवसर" है। बीएलओ चुनाव आयोग और नागरिकों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होने के साथ-साथ लोकतांत्रिक भागीदारी के दूत भी हैं।

उन्होंने कहा, "जमीनी स्तर पर काम कर रहे बीएलओ के अनुभवों, चुनौतियों और सुझावों को महत्व देने तथा तकनीक आधारित चुनावी प्रणाली को मजबूत करने से चुनाव प्रक्रिया और अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।"

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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