पीओके हिंसा को लेकर ब्रिटेन में विरोध, लोगों ने पाक दूतावास के बाहर किया प्रदर्शन
लंदन, 29 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चल रहे तनाव के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के समर्थन में ब्रिटिश कश्मीरियों ने बर्मिंघम में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने इस इलाके में आम नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई और कथित हिंसा के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई।
ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरियों का यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है, जब खबरों के मुताबिक पीओके में पिछले दो दिनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं। यह कार्रवाई इलाके में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच की गई।
सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से फैल रहे हैं, जिनमें बर्मिंघम स्थित पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर कश्मीरी प्रदर्शनकारी अपने जूते उतारते और मौजूदा हालात को लेकर गुस्सा जाहिर करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए और पीओके की आजादी की मांग भी की। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए।
कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पीओके के रावलाकोट, मीरपुर और अन्य इलाकों में पिछले कुछ दिनों से हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के कारण मृतकों और घायलों की संख्या 100 से ज्यादा हो सकती है। ब्रिटेन के कई सांसदों ने भी पीओके में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तान की कार्रवाई की आलोचना की है।
ब्रिटिश सांसद नाज शाह ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोली चलाने को 'बर्बर' बताया और इस मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की।
नाज शाह ने 'एक्स' पर लिखा, "जो लोग शांतिपूर्वक अपने राजनीतिक विचार रख रहे थे, उन पर सीधे गोली चलाना बर्बरता है।" उन्होंने जवाबदेही तय करने, इसकी निंदा करने और तुरंत कदम उठाकर शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की मांग की।
उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या के खिलाफ आवाज उठाना नैतिक और इंसानी जिम्मेदारी है। चुप रहना इंसानियत के साथ अन्याय है।
एक अन्य ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने कहा कि पीओके से गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों की चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं।
एक वीडियो संदेश में हुसैन ने कहा कि वह ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त से संपर्क कर ब्रिटिश कश्मीरियों की चिंताओं को सामने रखेंगे। उन्होंने ब्रिटेन सरकार के मंत्रियों से भी अपील की कि वे कूटनीतिक तरीकों का इस्तेमाल कर तनाव कम करने, हिंसा रोकने और बातचीत दोबारा शुरू कराने की कोशिश करें।
इससे पहले दिन में, यूकेपीएनपी ने आरोप लगाया कि पांच जून से अब तक 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, कई सौ लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और सैकड़ों लोगों को कथित रूप से जबरन गायब किया गया है।
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई की निंदा करते हुए यूकेपीएनपी ने कहा कि शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा या गैरकानूनी बल का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन हो सकता है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
समूह ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत कदम उठाने की अपील की। उसने कहा कि इन संस्थाओं को नागरिकों की सुरक्षा में मदद करनी चाहिए, घटनाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच का समर्थन करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों के पालन को बढ़ावा देना चाहिए।
--आईएएनएस
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