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केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए ‘प्रगति’ पहल का शुभारंभ किया

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए ‘प्रगति’ पहल का शुभारंभ किया
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए ‘प्रगति’ पहल का शुभारंभ किया

नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को 20,000 कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाने और 20 लाख किसानों को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान करने के लिए ‘प्रगति’ पहल का शुभारंभ किया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

इस पहल के बारे में बात करते हुए चौहान ने कहा कि विकसित कृषि क्षेत्र और समृद्ध गांवों के बिना 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें खेती की लागत कम करना, किसानों की आय बढ़ाना, फसल विविधता को बढ़ावा देना और कृषि को अधिक लाभदायक बनाना भी शामिल है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए केवल पारंपरिक खेती ही पर्याप्त नहीं है। इसलिए, मूल्यवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि 'प्रगति' इसी सोच का विस्तार है और किसानों को प्रौद्योगिकी, कृषि मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बेहतर बाजार पहुंच से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के रास्ते बनाने में मदद करेगी।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (एसबीआईएफ) और गेट्स फाउंडेशन जैसे कई संस्थानों की मदद से तैयार किया गया प्रगति कार्यक्रम, छोटे किसानों के जीवन स्तर को बदलने के लिए एक व्यापक, समावेशी और जलवायु-लचीली पुनर्योजी कृषि पहल को गति प्रदान करने का लक्ष्य रखता है।

यह कार्यक्रम भारत के कई राज्यों में पहले से लागू की गई कृषि-उद्यमिता पहलों से प्राप्त सीखों पर आधारित है।

इस पहल का समर्थन करने वाली संस्था की वरिष्ठ उपाध्यक्ष (वैश्विक सामाजिक प्रभाव) मोनिका बाउर ने कहा कि किसान स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और उनकी आजीविका का समर्थन करना अधिक सुदृढ़ खाद्य प्रणाली के निर्माण के लिए आवश्यक है।

उनके सहयोगी जागृत कोटेचा ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को अधिक टिकाऊ तरीके से खेती करने के लिए आवश्यक उपकरण और ज्ञान उपलब्ध कराना और आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाना है।

प्रगति कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में समावेशी भागीदारी और संतुलित प्रतिनिधित्व पर विशेष बल देते हुए 26,000 से अधिक कृषि उद्यमियों के मौजूदा नेटवर्क के अतिरिक्त 20,000 कृषि उद्यमियों का एक राष्ट्रव्यापी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।

अधिकारी ने बताया कि यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में लागू किया जाएगा।

--आईएएनएस

एमएस/

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