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भारत के श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी 7 वर्षों में 23 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हुई: मांडविया

नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने मंगलवार को बताया कि भारत में महिला श्रम भागीदारी दर 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत हो गई है, जो देश में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण को दर्शाती है।
भारत के श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी 7 वर्षों में 23 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हुई: मांडविया

नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने मंगलवार को बताया कि भारत में महिला श्रम भागीदारी दर 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत हो गई है, जो देश में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण को दर्शाती है।

फूड डिलीवरी स्टार्टअप स्विगी द्वारा आयोजित 'स्विगस्ट्री: सेलिब्रेटिंग वुमेन ऑन द मूव' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कार्यबल में महिलाओं की बराबर भागीदारी सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से जरूरी है और विकसित भारत बनाने में इसका बड़ा योगदान है।

मंत्री ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के लिए नए अवसर खुले हैं, जिससे रोजगार के आंकड़ों में बड़ा सुधार हुआ है। महिला श्रम भागीदारी दर 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है।"

उन्होंने बताया कि महिला वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (एफडब्ल्यूपीआर) भी इस दौरान 22 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 39 प्रतिशत हो गया है। वहीं, महिला बेरोजगारी दर (एफयूआर) 5.6 प्रतिशत से घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई है, जिससे पता चलता है कि अब ज्यादा महिलाएं नौकरी पा रही हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज लगभग तीन गुना बढ़ा है, जो 2015 में 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64.3 प्रतिशत हो गया है। यह श्रम कानून सुधार, डिजिटल समावेशन और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम है।

मंत्री ने पिछले नवंबर से लागू चार लेबर कोड्स का भी जिक्र किया और बताया कि इनसे बड़ा बदलाव आया है। खास बात यह है कि सोशल सिक्योरिटी कोड में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहचान दी गई है, जिनमें कई महिलाएं शामिल हैं। अब उन्हें कानूनी पहचान और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा, "समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत भी इन कोड्स में शामिल किया गया है, जो लैंगिक भेदभाव को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है।"

लेबर कोड्स में वर्क-फ्रॉम-होम की सुविधा, मातृत्व अवकाश और कार्यस्थल पर क्रेच जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। ये सभी उपाय उन बाधाओं को दूर करने में मदद करेंगे, जो पहले महिलाओं के रोजगार में बने रहने में मुश्किल पैदा करते थे।

--आईएएनएस

डीबीपी

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