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आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और ‘केसरी’ के पूर्व संपादक एमए कृष्णन का निधन

आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और ‘केसरी’ के पूर्व संपादक एमए कृष्णन का निधन
आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और ‘केसरी’ के पूर्व संपादक एमए कृष्णन का निधन

कोच्चि, 29 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और 'केसरी' के पूर्व मुख्य संपादक एमए कृष्णन का मंगलवार को 97 साल की उम्र में निधन हो गया।

उनके निधन के साथ ही केरल में संघ परिवार की सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के साथ उनका लंबा जुड़ाव समाप्त हो गया। उन्हें एमए सर के नाम से भी जाना जाता था।

कोच्चि के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हुआ। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और इसे राष्ट्रीय आंदोलनों तथा केरल के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

कृष्णन उन शुरुआती व्यक्तियों में से थे, जिन्होंने केरल में आरएसएस और उससे जुड़ी सांस्कृतिक पहलों के विस्तार के लिए काम किया। वे 1954 में आरएसएस प्रचारक बने और बाद में प्रांत बौद्धिक प्रमुख और प्रचार प्रमुख जैसी महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं।

उन्होंने 1964 में 'केसरी' के संपादक के तौर पर मीडिया के क्षेत्र में कदम रखा। अपने प्रकाशन और लेखों के जरिए उन्होंने कई सांस्कृतिक, सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। कृष्णन बच्चों की सांस्कृतिक गतिविधियों पर केंद्रित कई संगठनों और पहलों की स्थापना और विकास से भी गहराई से जुड़े हुए थे।

वे 'बालगोकुलम' और 'तपस्या कला साहित्य वेदी' के संस्थापक और मुख्य प्रेरक शक्ति थे।

चंद्रशेखर ने कहा कि केरल में बच्चों के बीच 'उन्नीकृष्णन' (छोटे कृष्ण) के किरदार को पेश करने और उनके सांस्कृतिक जीवन में उन्हें लोकप्रिय बनाने में कृष्णन ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे राज्य में 'श्री कृष्ण जयंती शोभायात्रा' को लोकप्रिय बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कृष्णन ने कई अन्य पहलों का भी नेतृत्व किया, जिनमें अमृताभारती, बालसंस्कारकेंद्रम, बालसाहिति प्रकाशन, इंटरनेशनल श्रीकृष्ण सेंटर और सौरक्षिका शामिल हैं। उनके काम का दायरा सिर्फ संगठन के कामकाज तक ही सीमित नहीं था।

'निलायुदे इतिहासम' जैसी उनकी रचनाओं में केरल के सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों के प्रति उनकी गहरी रुचि और जुड़ाव झलकता है। बालगोकुलम, जन्माष्टमी समारोह और 'तपस्या' की सांस्कृतिक गतिविधियों से उनके जुड़ाव ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में इन पहलों को स्थापित करने में मदद की।

चंद्रशेखर ने कहा कि संगठनात्मक, साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए कृष्णन का प्रभाव बेजोड़ था। उनका जीवन और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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