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भारत के भविष्य की आर्थिक प्रगति के लिए सेमीकंडक्टर उत्पादन बेहद महत्वपूर्ण: प्रो. जुजेर वासी

मुंबई, 29 मई (आईएएनएस)। सेमीकंडक्टर निर्माण और उससे जुड़ी तकनीकों के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से सम्मानित प्रोफेसर जुजेर वासी ने शुक्रवार को कहा कि सेमीकंडक्टर केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा प्रणाली, अंतरिक्ष तकनीक और भारत की आत्मनिर्भरता से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इनकी अहम भूमिका है।
भारत के भविष्य की आर्थिक प्रगति के लिए सेमीकंडक्टर उत्पादन बेहद महत्वपूर्ण: प्रो. जुजेर वासी

मुंबई, 29 मई (आईएएनएस)। सेमीकंडक्टर निर्माण और उससे जुड़ी तकनीकों के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से सम्मानित प्रोफेसर जुजेर वासी ने शुक्रवार को कहा कि सेमीकंडक्टर केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा प्रणाली, अंतरिक्ष तकनीक और भारत की आत्मनिर्भरता से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इनकी अहम भूमिका है।

विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में प्रो. वासी ने कहा कि यह सम्मान पाकर वे बेहद गौरवान्वित और आश्चर्यचकित महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वर्षों से उनका काम मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा (सोलर एनर्जी) के क्षेत्र में रहा है, जिन्हें उन्होंने भारत के दीर्घकालिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा, "सेमीकंडक्टर केवल चिप्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर्स की कई गतिविधियों को भी आगे बढ़ाते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "इसलिए सेमीकंडक्टर चिप्स और उससे जुड़ी तकनीकों का उत्पादन बहुत महत्वपूर्ण है।"

सेमीकंडक्टर के रणनीतिक महत्व को समझाते हुए प्रो. वासी ने कहा कि रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतरिक्ष तकनीक काफी हद तक विशेष प्रकार के सेमीकंडक्टर उपकरणों पर निर्भर करते हैं, जिनमें से कई उपकरण खुले बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होते।

अपने शुरुआती शोध कार्यों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने अंतरिक्ष उपयोग के लिए सेमीकंडक्टर डिवाइसेज पर रेडिएशन के प्रभावों का अध्ययन किया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत के लिए स्वदेशी रिसर्च और डेवलपमेंट क्षमताएं कितनी जरूरी हैं।

उन्होंने कहा, "वे चिप्स खुले बाजार में उपलब्ध नहीं थे, इसलिए भारत के लिए खुद का शोध करना जरूरी था।"

प्रो. वासी ने आगे कहा कि युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी सेमीकंडक्टर उत्पादन बेहद अहम हो जाता है, क्योंकि लगभग सभी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स इसी तकनीक पर आधारित होते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत करने और भविष्य की आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए सेमीकंडक्टर सेक्टर में रिसर्च, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में लगातार निवेश करना चाहिए।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, "सेमीकंडक्टर युद्ध के समय भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि लगभग सभी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स इन्हीं पर निर्भर करते हैं। इनमें से कई कंपोनेंट्स खुले बाजार में आसानी से नहीं मिलते। मैं एक उदाहरण देना चाहूंगा। अपने शुरुआती रिसर्च के दिनों में हमने सेमीकंडक्टर डिवाइसेज पर रेडिएशन के प्रभावों पर काम किया था, जो अंतरिक्ष तकनीक के लिए बहुत जरूरी है। उस समय भी वे चिप्स बाजार में उपलब्ध नहीं थे, इसलिए भारत को खुद रिसर्च करनी पड़ी। सेमीकंडक्टर के कई क्षेत्रों में यही स्थिति है।"

--आईएएनएस

डीबीपी

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