Samachar Nama
×

'सेमिकॉन 2.0' से अगले पांच वर्षों में 2 लाख तक रोजगार सृजित हो सकते हैं: उद्योग जगत

'सेमिकॉन 2.0' से अगले पांच वर्षों में 2 लाख तक रोजगार सृजित हो सकते हैं: उद्योग जगत
'सेमिकॉन 2.0' से अगले पांच वर्षों में 2 लाख तक रोजगार सृजित हो सकते हैं: उद्योग जगत

नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। उद्योग जगत ने शुक्रवार को कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत बनाने की पहल 'सेमिकॉन 2.0' अगले पांच वर्षों में 1.5 लाख से 2 लाख तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकती है। यह योजना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को केवल असेंबली आधारित मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़ाकर चिप डिजाइन, इंजीनियरिंग और इनोवेशन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

एनएलबी सर्विसेज के विश्लेषण के अनुसार, सेमीकंडक्टर मिशन का अगला चरण केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहेगा। इसका फोकस चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग और इंटेलिजेंट सप्लाई चेन ऑपरेशंस जैसे क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक समग्र इकोसिस्टम विकसित करने पर होगा।

यह आकलन ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1.27 लाख करोड़ रुपए के बजट परिव्यय के साथ 'सेमिकॉन 2.0' योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को और मजबूत बनाना है।

एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सचिन अलुग ने कहा कि वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम से जुड़े लगभग 70 प्रतिशत पदों की प्रकृति बदल जाएगी, जिसके चलते उच्च कौशल वाले इंजीनियरिंग पेशेवरों की मांग में तेज बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

उन्होंने अनुमान जताया कि वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर केंद्रित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, जिससे भारत की पहचान वैश्विक इंजीनियरिंग, रिसर्च और इनोवेशन हब के रूप में और मजबूत होगी।

सचिन अलुग ने कहा कि अब तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मुख्य रूप से असेंबली आधारित उत्पादन पर निर्भर रहा है। हालांकि, सेमिकॉन 2.0 योजना देश को वैल्यू चेन में आगे बढ़ने का अवसर देगी। इसके तहत चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और एडवांस्ड पैकेजिंग जैसी उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में क्षमताएं विकसित की जाएंगी, जिससे बौद्धिक संपदा (आईपी) का सृजन होगा और लंबे समय तक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल की जा सकेगी।

इससे पहले इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) भी कह चुका है कि सेमिकॉन 1.0 के तहत 20 अरब डॉलर से अधिक के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट आकर्षित किए जा चुके हैं। वहीं सेमिकॉन 2.0 में फैब यूनिट्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, डिजाइन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी), प्रतिभा विकास, उपकरण और कच्चे माल पर अधिक जोर दिया गया है, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद सेमीकंडक्टर साझेदार बनाया जा सके।

सरकार ने सेमिकॉन 2.0 के तहत 6 प्रमुख स्तंभों पर आधारित सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इनमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग उपकरण और सामग्री, फैब्रिकेशन सुविधाएं, एटीएमपी/ओसैट यूनिट्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) और प्रतिभा विकास शामिल हैं।

अब तक सरकार 12 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है, जिनमें कुल निवेश 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक का है।

--आईएएनएस

डीबीपी

Share this story

Tags