महिला आरक्षण बिल को तत्काल लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। संसद के आगामी विशेष सत्र से पहले सुप्रीम कोर्ट सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड की गई कॉजलिस्ट के अनुसार, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच 13 अप्रैल को कांग्रेस नेता जया ठाकुर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करेगी।
याचिका में यह तर्क दिया गया है कि महिलाओं के लिए एक-तिहाई कोटे का लाभ टाला नहीं जाना चाहिए और इसमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को तत्काल लागू करने की मांग की गई है। यह अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है।
नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि कानून के उस प्रावधान को रद्द करना बहुत मुश्किल होगा, जिसमें यह शर्त रखी गई है कि महिलाओं के लिए कोटा तभी लागू होगा जब अगली दस-वर्षीय जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
याचिका में यह तर्क दिया गया था कि ऐसी शर्तें जरूरी नहीं हैं, क्योंकि सीटों की संख्या पहले से ही तय है और देश की आबादी का लगभग आधा हिस्सा होने के बावजूद, महिलाओं का चुनी हुई संस्थाओं में प्रतिनिधित्व कम है।
यह सुनवाई इसलिए भी अहम है, क्योंकि उम्मीद है कि संसद 16 अप्रैल से शुरू होने वाले विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक पर चर्चा करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों में सभी राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर इस कानून को सर्वसम्मति से पारित कराने के लिए समर्थन मांगा है, ताकि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिला आरक्षण को लागू किया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में कहा कि भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को पाने के लिए विधायी संस्थाओं में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब वह समय आ गया है जब इस कानून को पूरे देश में सही भावना के साथ लागू किया जाए।
हालांकि, प्रस्तावित विशेष सत्र पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है, जिसने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनाव प्रचार को देखते हुए इस कदम को 'आचार संहिता का उल्लंघन' करार दिया है। कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से जुड़ी कोई भी विधायी प्रक्रिया शुरू करने से पहले, परिसीमन पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
--आईएएनएस
पीएसके

