केरल: एफआईआर दर्ज न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एर्नाकुलम के एसीपी को किया तलब
नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत मिलने के बावजूद केरल पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने इस मामले में एर्नाकुलम जिले के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश देते हुए पूछा है कि आखिर शिकायत मिलने के बाद भी एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि केरल सरकार द्वारा दायर हलफनामा पूरी तरह असंतोषजनक है, क्योंकि उसमें अदालत के मुख्य सवाल का जवाब ही नहीं दिया गया। कोर्ट ने 8 मई को पारित अपने आदेश में कहा, "सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि शिकायतकर्ता द्वारा डाक के माध्यम से भेजी गई शिकायत मिलने के तुरंत बाद एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई, इसका कोई जवाब नहीं दिया गया है।"
सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड में यह भी दर्ज किया कि शिकायत 8 जनवरी को एर्नाकुलम के एसीपी कार्यालय को प्राप्त हो गई थी। इसके बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया। अदालत ने एसीपी को 15 मई 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है।
इस मामले में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पहले दी गई अंतरिम राहत भी अगली सुनवाई तक जारी रखी है। यह राहत एर्नाकुलम सिटी के पनंगड पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर नंबर से जुड़ी है। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ता को जांच और ट्रायल में पूरा सहयोग करना होगा।
पिछली सुनवाई के दौरान 2 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने केरल पुलिस से उस शिकायत को लेकर सवाल किए थे, जिसमें सह आरोपी ने उसी घटना से जुड़े मामले में अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय की एक महिला से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। इस शिकायत के समर्थन में मेडिकल रिपोर्ट भी पेश की गई थी, जिसमें चोटों का उल्लेख था, लेकिन पुलिस द्वारा उस पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था, “हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि जब जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया है और इस मुद्दे को याचिका में एक से अधिक जगह उठाया गया है, तब भी जवाबी हलफनामे में इस पर कोई उत्तर क्यों नहीं दिया गया।”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पुलिस की कथित निष्क्रियता का मामला व्यापक प्रभाव वाला है, क्योंकि यह लोगों के पुलिस पर भरोसे से जुड़ा हुआ है, खासकर तब जब वे सबूतों के साथ शिकायत लेकर पुलिस के पास जाते हैं।
अदालत ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि अधिकारियों की ओर से कर्तव्य में लापरवाही साबित हुई, तो वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाएगी।
--आईएएनएस
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