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केरल: महंगाई पर विधानसभा में सरकार और विपक्ष आमने-सामने, विजयन के नेतृत्व में विपक्ष का वॉकआउट

तिरुवनंतपुरम, 2 जून (आईएएनएस)। केरल विधानसभा के नए सत्र में मंगलवार को पहली बड़ी राजनीतिक टक्कर देखने को मिली। आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर चर्चा के दौरान सत्तारूढ़ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार और वामपंथी विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। मामला इतना बढ़ गया कि विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
केरल: महंगाई पर विधानसभा में सरकार और विपक्ष आमने-सामने, विजयन के नेतृत्व में विपक्ष का वॉकआउट

तिरुवनंतपुरम, 2 जून (आईएएनएस)। केरल विधानसभा के नए सत्र में मंगलवार को पहली बड़ी राजनीतिक टक्कर देखने को मिली। आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर चर्चा के दौरान सत्तारूढ़ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार और वामपंथी विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। मामला इतना बढ़ गया कि विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

उपाध्यक्ष पद के लिए शानीमोल उस्मान के चुनाव के तुरंत बाद विपक्ष ने जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का कहना था कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई लगातार बढ़ रही है।

पूर्व वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को उनके पुराने बयानों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि जब सतीशन विपक्ष के नेता थे, तब वे पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने पर तत्कालीन वाम सरकार से टैक्स कम करने की मांग करते थे।

बालगोपाल ने कहा, "हम जानना चाहते हैं कि क्या मुख्यमंत्री अब वही करेंगे, जिसकी मांग वे विपक्ष में रहते हुए करते थे और लोगों को राहत देंगे?"

इस पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सतीशन ने पिछली वाम सरकार की वित्तीय स्थिति को मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि 10 साल के वाम शासन के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति काफी दबाव में है, जिससे सरकार के लिए तुरंत बड़े राहत पैकेज देना आसान नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार केरल की आर्थिक स्थिति पर एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) तैयार कर रही है। मैं अभी इसकी पूरी जानकारी नहीं दे सकता, लेकिन यह जरूर बताएगा कि पिछले 10 वर्षों में क्या हुआ। केरल एक उपभोक्ता राज्य है और यहां महंगाई को नियंत्रित करने के लिए बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप की जरूरत है।

सतीशन ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन) पर लगभग 2,800 करोड़ रुपए का बकाया छोड़ गई है, जिससे सरकार की बाजार में हस्तक्षेप करने की क्षमता प्रभावित हुई है।

मुख्यमंत्री के इन बयानों पर विपक्ष के नेता विजयन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार असली मुद्दे से ध्यान भटका रही है। विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री चर्चा को दूसरी दिशा में ले जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने के बावजूद आम लोगों को पर्याप्त राहत नहीं दी गई। अब इसका बोझ जनता पर डाला जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतें राज्य में महंगाई बढ़ाने का मुख्य कारण हैं। विजयन ने केंद्र सरकार की पेट्रोलियम मूल्य निर्धारण नीति की भी आलोचना की और कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा से बच रही है। इसके विरोध में वामपंथी विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया।

इसके बाद सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई, जब विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने भाजपा विधायक गोपाकुमार को बोलने की अनुमति दे दी।

वामपंथी सदस्यों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि परंपरा के अनुसार पहले विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।

विरोध बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया और स्थिति को सामान्य बनाया।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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