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सनातन धर्म एक फिलॉसफी नहीं, यह 10 हजार साल से चला आ रहा : सोनम वांगचुक की पत्नी (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

सनातन धर्म एक फिलॉसफी नहीं, यह 10 हजार साल से चला आ रहा : सोनम वांगचुक की पत्नी (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)
सनातन धर्म एक फिलॉसफी नहीं, यह 10 हजार साल से चला आ रहा : सोनम वांगचुक की पत्नी (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

भुवनेश्वर, 3 सितंबर (आईएएनएस)। सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सनातन धर्म को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म एक फिलॉसफी नहीं है। यह पिछले दस हजार सालों से वेदों से वेदांत तक, गीता से मीरा के भक्ति आंदोलन तक और आज तक विकसित होता रहा है।

गीतांजलि अंगमो ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "लेफ्ट वालों को 'लिबरल' (उदारवादी) माना जाता है और 'राइट विंग' को ट्रेडिशन मानने वाले या ऑर्थोडॉक्स माना जाता है। हालांकि, यह भी समझा जाने लगा है कि एथीस्ट, जो किसी फिलॉसफी या भगवान को नहीं मानते हैं, वे लेफ्ट हैं और जो हिंदू और अन्य को मानते हैं वो राइट विंग हैं। लेकिन अगर हम श्री अरबिंदो को समझें, तो ये दोनों चीजें आपस में सहजता से मिल जाती हैं।"

उन्होंने कहा, "उन्होंने कहा कि हम हिंदू धर्म को सनातन भी कहते हैं, वह कोई तय या कठोर विचारधारा नहीं है। यह कोई फिलॉसफी नहीं है। यह पिछले दस हजार सालों में विकसित हुआ है। वेदों से वेदांत तक, गीता से मीरा के भक्ति आंदोलन तक और आज के समय तक। श्री अरबिंदो का नजरिया भी इसी विकास का हिस्सा है।"

गीतांजलि अंगमो ने कहा कि जब कृष्ण आते हैं, तो वे उस समय के लोगों के लिए गीता के माध्यम से उपनिषदों की गहरी शिक्षाओं को समझाते हैं। उसी तरह, श्री अरबिंदो आधुनिक युग के लिए उसी गीता और भारतीय दर्शन को एक नए नजरिए से पेश करते हैं। इसलिए, इसे सिर्फ 'राइट-विंग' या 'पारंपरिक' कहना सही नहीं है।

अंगमो ने कहा, "मेरे लिए, सनातन धर्म बहुत आजादी देने वाला है, क्योंकि इसका मूल मकसद ही मुक्ति है। अगर मुक्ति ही लक्ष्य है, तो मेरे लिए 'राइट' (दक्षिणपंथी) भी 'लिबरल' (उदारवादी) का ही पर्याय बन जाता है। इसलिए, लेफ्ट और राइट के बीच का आम राजनीतिक बंटवारा भारतीय संदर्भ में पूरी तरह से फिट नहीं बैठता है।"

उन्होंने कहा, "नेपोलियन के समय में लेफ्ट वाले दुनिया के बारे में सोचने का एक नया तरीका चाहते थे, जबकि राइट वाले परंपराओं का पालन करने के पक्ष में थे। लेकिन भारत में, सनातन धर्म में हमेशा से एक शाश्वत खोज, एक भावना और एक सच्चाई रही है। उसे ढूंढने के अलग-अलग तरीके, अलग-अलग फिलॉसफी और फिर उसे जाहिर करने के अलग-अलग तरीके हैं। इसलिए, मूल रूप से इसमें एक उदारवादी सोच है।"

गीतांजलि अंगमो ने कहा कि हमें अपने दार्शनिक ढांचे की तलाश करनी चाहिए। अपने आप को राजनीति और विचारधारा के तौर पर ध्रुवीकृत नहीं होने देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सनातन शाश्वत है और सार्वभौमिक भी है। उसमें हर चीज शामिल होती है। वह सिर्फ 'हिंदुइज्म' नहीं है। उन्होंने आगे कहा, "'धर्म' शब्द 'धृ' से आता है, जिसका अर्थ है 'जो थामे रखता है' या 'जो सबको साथ लेकर चलता है'।"

--आईएएनएस

डीसीएच/

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