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सबरीमाला गोल्ड स्कैम: जेल में बंद अंतिम आरोपी को भी मिली जमानत

कोल्लम, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। सबरीमाला टेंपल गोल्ड स्कैम में एक अहम घटनाक्रम के तहत केरल के कोल्लम की एक अदालत ने सोमवार को केपी शंकरदास को जमानत दे दी। शंकरदास उन 13 लोगों में से अंतिम आरोपी थे, जिन्हें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने गिरफ्तार किया था और जो अब तक हिरासत में थे।
सबरीमाला गोल्ड स्कैम: जेल में बंद अंतिम आरोपी को भी मिली जमानत

कोल्लम, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। सबरीमाला टेंपल गोल्ड स्कैम में एक अहम घटनाक्रम के तहत केरल के कोल्लम की एक अदालत ने सोमवार को केपी शंकरदास को जमानत दे दी। शंकरदास उन 13 लोगों में से अंतिम आरोपी थे, जिन्हें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने गिरफ्तार किया था और जो अब तक हिरासत में थे।

सबरीमाला मंदिर में सोने के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के लिए केरल हाई कोर्ट के निर्देशों पर एसआईटी का गठन किया गया था।

शंकरदास को जमानत मिलने के साथ ही एसआईटी द्वारा दर्ज किए गए दोनों मामलों में शामिल सभी आरोपी अब जमानत पर बाहर हैं। यह इस हाई-प्रोफाइल जांच का एक अहम पड़ाव है, जिसने पूरे राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल मचा दी है।

इस मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए लोगों में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के एक सेवारत अधिकारी, पूर्व कर्मचारी, सोने के कारोबारी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

आरोपियों की सूची में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी का नाम भी शामिल है, जिस पर सोने की कथित हेराफेरी के नेटवर्क का केंद्र होने का आरोप है।

यह मामला पहाड़ी मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने के चढ़ावे के रखरखाव और हिसाब-किताब में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोपों से जुड़ा है। यह मंदिर देश के सबसे अमीर और सबसे ज्यादा दर्शनार्थियों वाले तीर्थस्थलों में से एक है।

मंदिर की संपत्तियों से जुड़ी संभावित हेराफेरी और अनाधिकृत लेन-देन को लेकर बढ़ती शिकायतों और जनता के भारी विरोध के बाद एसआईटी जांच शुरू की गई थी।

जांचकर्ताओं ने पहले संकेत दिया था कि आरोपी बिचौलियों और अंदर के लोगों के एक नेटवर्क के जरिए काम करते थे, जिससे मंदिर की कीमती चीजों के प्रबंधन में मौजूद व्यवस्थागत कमियों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

अधिकारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की संलिप्तता ने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है, जिसके चलते अधिक पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही की मांगें जोर पकड़ रही हैं।

--आईएएनएस

एमएस/

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