शिवसेना (यूबीटी) ने चुनाव आयोग पर वोटिंग से वंचित करने का लगाया आरोप, 'सामना' में जन-आक्रोश की चेतावनी
मुंबई, 28 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार को सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और राजनीतिक फायदे के लिए अहम संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
यह आलोचना उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आई है जिनमें चुनाव आयोग के अंदर वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) को लेकर गंभीर अंदरूनी मतभेदों का खुलासा हुआ था। पार्टी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी बातों के सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा और राजनीतिक तनाव बढ़ा है, जिसके चलते भारत के बड़े शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित पक्षपात की कड़ी निंदा करते हुए पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में ठाकरे गुट ने मौजूदा स्थिति को भारतीय लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया।
'सामना' के संपादकीय में कहा गया है कि संवैधानिक पदों का इस्तेमाल पक्षपाती तरीके से किया जा रहा है। इसमें आरोप लगाया गया कि चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की रणनीति के तहत महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे अहम राज्यों में 13 करोड़ वोटरों को सुनियोजित तरीके से वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया।
संपादकीय में कहा गया, "मुख्य चुनाव आयुक्त के कामों ने एक स्वायत्त संस्था की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाया है। लोकतंत्र के निष्पक्ष मध्यस्थ के तौर पर काम करने के बजाय, चुनाव आयोग राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है।" इसमें शीर्ष अधिकारियों के तुरंत इस्तीफे और जवाबदेही की मांग की गई।
संपादकीय में कहा गया कि इस विवाद ने लोगों में गुस्से की लहर पैदा कर दी है। इसमें दावा किया गया, "नई दिल्ली में वीकेंड पर हजारों प्रदर्शनकारी, छात्र समूह और राजनीतिक कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर जमा हुए और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।"
संपादकीय के अनुसार, भारी पुलिस और सुरक्षा बल ने विरोध स्थल और सेंट्रल दिल्ली के अहम इलाकों को घेर लिया और कई गिरफ्तारियां कीं, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। मुंबई में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारी मेट्रो स्टेशनों, रेलवे प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक जगहों पर जमा होकर कथित चुनावी गड़बड़ियों और प्रशासन की मनमानी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे थे।
संपादकीय में कहा गया, "केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के इस खुलासे के बाद तनाव और बढ़ गया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने, जब वे एक सीनियर नौकरशाह के तौर पर काम कर रहे थे, उन्हें भाजपा में शामिल होने और केरल से पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मनाने की कोशिश की थी, और जीतने पर केंद्र में मंत्री पद का वादा किया था।"
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि इस राजनीतिक घटनाक्रम ने विपक्षी ताकतों को एकजुट कर दिया है। खबरों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और वामपंथी दलों से संपर्क किया है। उन्होंने 'इंडिया' गठबंधन के तहत एक संयुक्त मोर्चा बनाने का आग्रह किया है ताकि सरकार के खिलाफ एक मिली-जुली रणनीति बनाई जा सके और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की जा सके।
वहीं, भाजपा के प्रवक्ताओं और भाजपा शासित राज्यों के नेताओं ने चुनाव आयोग का बचाव किया और इन आरोपों को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी बताकर खारिज कर दिया। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता की नाराजगी तेजी से एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। संपादकीय में चेतावनी दी गई है कि जब तक संवैधानिक गरिमा बहाल नहीं की जाती, तब तक जनता का व्यापक असंतोष सरकार की वैधता के लिए चुनौती बना रहेगा।
--आईएएनएस
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