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जम्मू-कश्मीर में सड़कों और पुलों के लिए 185 करोड़ रुपए होंगे खर्च : उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर में सड़कों और पुलों के लिए 185 करोड़ रुपए होंगे खर्च : उमर अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर में सड़कों और पुलों के लिए 185 करोड़ रुपए होंगे खर्च : उमर अब्दुल्ला

श्रीनगर, 21 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को विधानसभा को बताया कि क्षेत्र में क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की बहाली पर 185 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

विधानसभा के शरद सत्र के प्रश्नकाल के दौरान राजौरी के विधायक इफ्तिखार अहमद के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजौरी विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किया गया है। प्रभावित परिवारों को राहत राशि दी गई है और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की स्थायी बहाली के लिए योजनाएं तैयार की गई हैं। मुख्यमंत्री के पास आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण विभाग भी है।

उन्होंने बताया कि राजौरी जिला प्रशासन को परिवारों को हुए नुकसान से जुड़े 149 मामले मिले थे। एसडीआरएफ के नियमों के तहत प्रभावित परिवारों को 40.61 लाख रुपए दिए गए हैं, जबकि मुख्यमंत्री राहत कोष से 2.81 करोड़ रुपए जारी किए गए।

राजौरी जिले में सड़कों और पुलों को हुए नुकसान का शुरुआती आकलन पूरा कर लिया गया है। कुल 403 सड़कों और पुलों की स्थायी बहाली के लिए 185 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

बिजली के बुनियादी ढांचे को लेकर उमर अब्दुल्ला ने बताया कि जुलाई 2026 में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण राजौरी जिले में 27.99 करोड़ रुपए के नुकसान का आकलन किया गया। इसमें से 9.39 करोड़ रुपए का नुकसान राजौरी विधानसभा क्षेत्र में हुआ। अस्थायी बहाली के लिए 132 केवी राजौरी-द्राबा ट्रांसमिशन लाइन पर इमरजेंसी रेस्टोरेशन सिस्टम (ईआरएस) टावर लगाया गया। स्थायी बहाली के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।

उन्होंने बताया कि राजौरी जिले में बिजली आपूर्ति की अस्थायी बहाली के लिए एसडीआरएफ के तहत 1.25 करोड़ रुपए मिले हैं। इसमें से 57.60 लाख रुपए राजौरी विधानसभा क्षेत्र के लिए आवंटित किए गए।

कृषि क्षेत्र में हुए नुकसान पर मुख्यमंत्री ने बताया कि 416 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्के की फसल प्रभावित हुई है, जिसमें 15 प्रतिशत नुकसान का आकलन किया गया है। वहीं, 101.50 हेक्टेयर में धान की फसल प्रभावित हुई और इसमें 65 प्रतिशत नुकसान हुआ है। जल शक्ति और लोक निर्माण (आरएंडबी) विभागों ने जलापूर्ति, सिंचाई और सड़क के बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का भी विस्तृत आकलन किया है।

उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त सभी सड़कों, पुलों, जलापूर्ति और बिजली योजनाओं को एक महीने के भीतर अस्थायी रूप से बहाल कर दिया गया। स्थायी बहाली के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर विचार किया जा रहा है। बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा और जरूरत के अनुसार उसका स्थान भी बदला जाएगा। भविष्य में किसी तरह का नुकसान होने पर तुरंत बहाली के लिए पर्याप्त अतिरिक्त उपकरण और सामग्री उपलब्ध रखी जाएगी।

एसडीआरएफ के तहत मुआवजा बढ़ाने की मांग पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इसके नियमों में बदलाव करना भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।

विधायक मीर मोहम्मद फैयाज के तारांकित प्रश्न का जवाब देते हुए उमर अब्दुल्ला ने बताया कि कुपवाड़ा जिले में रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत 29 बस्तियों और 1,936 घरों को बिजली से जोड़ने का काम चल रहा है। मुख्यमंत्री के पास बिजली विभाग का प्रभार भी है।

कुपवाड़ा जिले के 10 ब्लॉकों में 14.74 करोड़ रुपए के कार्यों के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड (एलओए) जारी किए गए हैं। ये काम मूरी, मणिगाह, कुमकड़ी, तंगधार, रेडे चौकीबल, वावूरा, माछिल, केरन, हयहामा, करूस, टीटवाल, सोगम और कादिराबाद की बस्तियों में किए जाएंगे।

सर्वे, ड्रॉइंग और बिल ऑफ क्वांटिटीज (बीओक्यू) का काम पूरा हो चुका है, जबकि जरूरी सामग्री की खरीद की प्रक्रिया जारी है। पांच ब्लॉकों की 10 बस्तियों में काम शुरू हो चुका है और अब तक 86 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीएसएस के तहत मंजूर डीपीआर के अनुसार बाकी सभी घरों तक बिजली पहुंचाने की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इस काम को अक्टूबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। चालू वित्त वर्ष में कुपवाड़ा जिले के लिए 3.68 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।

उन्होंने विधानसभा को भरोसा दिलाया कि कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (केपीडीसीएल) तय समय के भीतर विद्युतीकरण का काम पूरा करने और लोगों को भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी

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