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रितु बराला मामले में जीरो एफआईआर की मांग, जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस का धरना जारी

रितु बराला मामले में जीरो एफआईआर की मांग, जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस का धरना जारी
रितु बराला मामले में जीरो एफआईआर की मांग, जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस का धरना जारी

जयपुर, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली में एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला से मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में 'जीरो एफआईआर' दर्ज करने की मांग को लेकर जयपुर में कांग्रेस नेताओं का पुलिस कमिश्नरेट के बाहर धरना मंगलवार को भी जारी रहा।

सोमवार शाम शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब 24वें घंटे में प्रवेश कर गया है, और इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं तथा पुलिस के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कमिश्नरेट के बाहर नारेबाजी की, जिसके चलते पुलिसकर्मियों के साथ उनकी झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया।

इस बीच, जयपुर पुलिस ने कहा कि 13 अक्टूबर की घटना के संबंध में दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में पहले से ही एक मामला दर्ज है, इसलिए अलग से एफआईआर दर्ज करने की कोई जरूरत नहीं है।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) अजय सिंह ने बताया कि बराला की शिकायत को चल रही जांच में शामिल कर लिया गया है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा ने पुलिस को चुनौती दी कि वे दिल्ली में दर्ज एफआईआर की एक कॉपी पेश करें। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस यह दस्तावेज उपलब्ध करा देती है, तो कांग्रेस नेता अपना विरोध प्रदर्शन खत्म कर देंगे।

डोटासरा और अन्य कांग्रेस नेताओं ने सोमवार की रात पुलिस कमिश्नरेट में फर्श पर सोकर बिताई। मंगलवार को उन्होंने विरोध स्थल पर ही चाय और नाश्ता भी किया।

यह विरोध प्रदर्शन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक फोन कॉल के बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने डोटासरा से कहा था कि वे सुनिश्चित करें कि इस मामले में जयपुर में एफआईआर दर्ज हो। डोटासरा सोमवार शाम करीब 6:15 बजे कमिश्नरेट पहुंचे।

जयपुर कमिश्नरेट में एफआईआर दर्ज न होने से नाराज पीसीसी प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा ने कांग्रेस के एक साथी नेता से पूछा कि जयपुर पुलिस कमिश्नर कहां मिल सकते हैं। कांग्रेस नेता ने जवाब दिया, "भाजपा खेमे में।"

कांग्रेस नेताओं ने रितु बराला मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर अपना धरना जारी रखा।

डोटासरा ने कहा, "पुलिस हमें दिखाए कि दिल्ली में कौन सी एफआईआर दर्ज की गई है। अगर वे इसे दिखा दें, तो हम तुरंत यहां से चले जाएंगे। असल में पुलिस ने दिल्ली में इन युवाओं के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज की है।"

पीसीसी प्रमुख ने आगे कहा, "जीरो एफआईआर दर्ज कराना हमारा कानूनी अधिकार है। इसे दर्ज करने में क्या दिक्कत है? केरल में एक जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस गलत बयान दे रही है। हमसे किसी ने बात नहीं की है। हम आखिरी दम तक लड़ेंगे। हम पुलिस के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं।"

राजस्थान में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने सवाल किया कि दिल्ली और जयपुर में बराला द्वारा शिकायतें देने के बावजूद एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई।

टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि दिल्ली में बराला की शिकायत को औपचारिक रूप से दर्ज नहीं किया गया और जयपुर में दी गई उनकी शिकायत भी दर्ज नहीं हुई। उन्होंने पूछा, "क्या ये भाजपा सदस्य खुद को कानून से ऊपर समझते हैं?"

उन्होंने कहा, "आप जितना चाहें तानाशाही कर लें। जनता सब देख रही है और सही समय आने पर आपको जवाब जरूर देगी।"

जूली ने अधिकारियों पर यह आरोप भी लगाया कि वे महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अपनी ही कही गई बातों के उलट काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "जो लोग महिलाओं की सुरक्षा, उनके सम्मान और 'बेटी बचाओ' अभियान की बात करते हैं, वे खुद ही एक बेटी के साथ अन्याय कर रहे हैं। हम यहां डटे हुए हैं; पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी ही होगी।"

जयपुर पुलिस ने बताया कि घटना वाले दिन, 13 अक्टूबर को रितु बराला ने दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी और दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। इसलिए, जयपुर पुलिस ने उन्हीं तथ्यों के आधार पर जयपुर में एक अलग एफआईआर दर्ज करना कानूनी रूप से उचित नहीं समझा।

पुलिस ने बराला के इस दावे को भी गलत बताया कि वह दिल्ली में रिपोर्ट दर्ज नहीं करा पाईं क्योंकि वह अपने इलाज में व्यस्त थीं।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

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