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यूएन कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान में ईसाई लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन पर हुई चर्चा

यूएन कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान में ईसाई लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन पर हुई चर्चा
यूएन कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान में ईसाई लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन पर हुई चर्चा

इस्लामाबाद, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में ईसाई लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ व्यवस्थित अधिकारों के उल्लंघन के संकट को लेकर हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान चर्चा की गई। मानवाधिकार संगठन जुबली कैंपेन ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएनओजी) में 'पाकिस्तान में मानवाधिकार (पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह को संबोधित करना)' शीर्षक से कार्यक्रम का आयोजन किया था।

इस कार्यक्रम का संचालन जुबली कैंपेन (जेसी) की कम्युनिकेशन एसोसिएट हिल्डा फार्मिंगटन ने किया और पैनल में जुबली कैंपेन से जोसेफ जानसेन, अल्पसंख्यक मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक प्रोफेसर निकोलस लेवरेट और यूरोपियन सेंटर फॉर लॉ एंड जस्टिस (ईसीएलजे) के एडवोकेसी ऑफिसर क्रिस्टोफ फोल्टजेनलोगेल शामिल थे।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पाकिस्तान में लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म-परिवर्तन और निकाह को लेकर चिंता जताई। इस दौरान विशेष तौर पर ईसाई और हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों पर हो रहे अत्याचारों पर चर्चा हुई। तुर्किए में रह रही पत्रकार उजाय बुलुत ने पीजे मीडिया में लिखा कि जुबिली कैंपेन की हिल्डा फार्मिंगटन ने बताया कि पाकिस्तान में हर साल लगभग एक हजार लड़कियों का अपहरण कर जबरन उनका धर्म बदला जाता है और निकाह कराया जाता है जबकि जमीनी हकीकत में यह आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है।

कार्यक्रम के दौरान अंबर नदीम, मारिया शहबाज और सताइश मरियम के माता-पिता ने अपनी बेटियों के लापता होने और पाकिस्तान में शिकायत दर्ज कराने में आने वाली कठिनाइयों और अदालतों से राहत न मिलने के बारे में बताया।

परिवारों ने पुलिस और न्यायिक कार्यवाही में देरी को लेकर चिंता जताई और अपहरणकर्ताओं की हिरासत में रखी गई नाबालिगों की असुरक्षा का मुद्दा उठाया। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बेटियों की वापसी के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

निकोलस लेवरेट ने जबरन धर्म-परिवर्तन और शादी को एक गंभीर समस्या बताया जो धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रभावित करती है। उन्होंने पाकिस्तान में जबरन धर्म-परिवर्तन और बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के लागू न होने पर चिंता जताई। पीजे मीडिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वह अपने मानवाधिकार दायित्वों को खुद लागू करे, अंतरराष्ट्रीय समर्थन केवल जरूरत पड़ने पर ही लिया जाए।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के विशेषज्ञ और न्यायविद क्रिस्टोफ फोल्टजेनलोगेल ने कहा कि पाकिस्तान में बाल संरक्षण, धार्मिक स्वतंत्रता और बाल विवाह को लेकर पहले से ही कई कानूनी सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, लेकिन मौजूदा कानूनों को लागू नहीं किया जा रहा है।

जोसेफ जॉनसन ने कहा कि उनके संगठन ने 2019 से 2025 के बीच 210 मामलों का दस्तावेजीकरण किया है और 'स्टोलन गर्ल्स' नाम से एक प्रस्तुति दी, जिसमें सामने आया कि दर्ज किए गए ज्यादातर मामले पंजाब और सिंध प्रांत से हैं।

उन्होंने कहा कि इन मामलों में पीड़िताएं कानूनी विवाह योग्य उम्र से कम थीं और अपहरणकर्ता ज्यादातर अधिक उम्र के थे। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में पुलिस ने शुरुआत में शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया और पुलिस व न्यायिक प्रक्रियाओं में खामियों की वजह से ऐसे उल्लंघन लगातार हो रहे हैं।

पिछले महीने, एक प्रमुख अल्पसंख्यक अधिकार संगठन ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो नाबालिग हिंदू बहनों के अपहरण, जबरन धर्म-परिवर्तन और विवाह पर गंभीर चिंता जताई थी, और कहा था कि यह मामला देशभर में हिंदू लड़कियों के सामने आने वाले लगातार खतरों को उजागर करता है।

वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) के अनुसार, परिवार ने आरोप लगाया कि 13 और 14 साल की रूपी और सीता का सिंध के टंडो अल्लाहयार जिले की इब्राहिम कॉलोनी से अपहरण कर लिया गया, जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया और दो मुस्लिम पुरुषों अमजद सोलंगी और मंसूर सोलंगी से निकाह करवा दिया गया।

अधिकार संगठन ने रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि अधिकारियों ने लड़कियों को अपहरण के मामले में टंडो अल्लाहयार की एक अदालत में पेश किया। संगठन ने कहा कि अदालत ने बाद में बहनों को तुरंत उनके परिवार को सौंपने के बजाय एक सुरक्षित आश्रय स्थल (सेफ हाउस) भेज दिया।

--आईएएनएस

केके/पीएम

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