स्वास्थ्य का अधिकार सुनिश्चित करने में भारत की न्यायपालिका की अहम भूमिका: अरुण गोविल
न्यूयॉर्क, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा सांसद अरुण गोविल ने स्वास्थ्य के अधिकार को मजबूत बनाने में भारत की न्यायपालिका की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के उस विशेष दूत के साथ हुई बातचीत में सुप्रीम कोर्ट की ओर से संविधान के अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या का उल्लेख किया, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के सर्वोच्च संभव स्तर के अधिकार से जुड़ा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन (न्यूयॉर्क) ने 'एक्स' पोस्ट पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि चर्चा का मुख्य विषय था, 'स्वास्थ्य के अधिकार को न्यायिक रूप से लागू कर न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करना।'
बातचीत के दौरान गोविल ने माना कि इलाज का खर्च, भाषा की बाधा, दूरी और कानूनी जानकारी की कमी जैसी समस्याएं लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार का पूरा लाभ लेने में रुकावट बन सकती हैं। उन्होंने कॉरपोरेट कंपनियों की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया और दुनिया भर की अच्छी पहलों को रिपोर्ट में शामिल करने की सराहना की।
उन्होंने कहा, "हम विशेष दूत का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने रिपोर्ट में एक समयानुकूल और महत्वपूर्ण विषय उठाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि खर्च, भाषा, दूरी और कानूनी जागरूकता जैसी बाधाएं लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार को प्रभावित करती हैं। इसमें यह भी बताया गया है कि कुछ मामलों में कॉरपोरेट ताकत जवाबदेही से बच निकलती है।"
उन्होंने कहा, "हमें यह भी अच्छा लगा कि रिपोर्ट में दुनिया भर के अच्छे उदाहरणों पर ध्यान दिया गया है, जिससे सदस्य देश एक-दूसरे से सीख सकते हैं। यह विषय भारत के अनुभव से भी जुड़ा हुआ है। वर्षों से भारत का सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन के अधिकार की व्याख्या करते हुए उसमें स्वास्थ्य के अधिकार को भी शामिल मानता रहा है।"
गोविल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं का अधिकार भी शामिल है। उन्होंने 1995 के एक महत्वपूर्ण फैसले का जिक्र किया, जिसमें श्रमिकों के स्वास्थ्य और कल्याण पर जोर दिया गया था। अदालत ने कहा था कि औद्योगिक विकास कर्मचारियों की सेहत की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, "1995 में ही अदालत ने साफ कर दिया था कि स्वास्थ्य और चिकित्सा देखभाल का अधिकार मौलिक अधिकार है। साथ ही नियोक्ताओं को कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था, ताकि उद्योगों की प्रगति श्रमिकों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाकर न हो।"
गोविल ने उन न्यायिक हस्तक्षेपों का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य मरीजों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना और अस्पतालों की सुविधाओं में सुधार करना था।
उन्होंने कहा कि अदालतों ने स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण को भी अनुच्छेद 21 का हिस्सा माना है। उन्होंने बताया कि 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से मुक्त रहने को भी संविधान के तहत एक अधिकार के रूप में मान्यता दी थी।
उन्होंने कहा, "हमारी अदालतों ने स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले अन्य पहलुओं पर भी ध्यान दिया है। स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। 2024 में अदालत ने जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा को भी संवैधानिक अधिकार माना।"
गोविल ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी वाले लेबल लगाने से जुड़े हालिया न्यायिक निर्देशों का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे स्वास्थ्य पर व्यावसायिक प्रभावों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। साथ ही उन्होंने प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से संबंधित भारतीय सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करने के लिए विशेष दूत का स्वागत किया।
गोविल ने कहा कि भारत स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुलभ, किफायती और समान बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। भारत ने अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं, ताकि हर व्यक्ति को आसानी से और उचित लागत पर इलाज मिल सके। हम इस बात के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि देश के हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।
--आईएएनएस
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