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तेलंगाना के सीएम का केसीआर पर आरोप, मियापुर में 50 हजार करोड़ रुपये की जमीन कब्जाने की थी कोशिश

तेलंगाना के सीएम का केसीआर पर आरोप, मियापुर में 50 हजार करोड़ रुपये की जमीन कब्जाने की थी कोशिश
तेलंगाना के सीएम का केसीआर पर आरोप, मियापुर में 50 हजार करोड़ रुपये की जमीन कब्जाने की थी कोशिश

हैदराबाद, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि केसीआर ने हैदराबाद के मियापुर में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की कीमत वाली बेशकीमती 550 एकड़ जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक दिन पहले मियापुर की 550 एकड़ जमीन पर तेलंगाना सरकार के दावे को बरकरार रखने के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जमीन का कब्जा लेने और उसकी घेराबंदी करने का निर्देश दिया। दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेवंत रेड्डी ने 23 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने जमीन पर राज्य सरकार के दावे को बरकरार रखने के लिए शीर्ष अदालत का आभार जताया।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, उनके करीबी सहयोगी और राज्यसभा सांसद दामोदर राव तथा 'नमस्ते तेलंगाना' के सीएमडी ने कारोबारी गोल्डस्टोन प्रसाद को आगे करके इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी। रेवंत रेड्डी ने कहा, "इस जमीन की रक्षा करके सुप्रीम कोर्ट ने सुनिश्चित किया है कि ये मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियां तेलंगाना के लोगों के पास रहें। यह राज्य और उसके लोगों के हित में एक ऐतिहासिक फैसला है।"

उन्होंने कहा कि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के शासनकाल में कांग्रेस विपक्ष में थी और उसने इस जमीन को बचाने के लिए तत्कालीन राज्य सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद राज्य सरकार ने अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखा और अनुकूल फैसला हासिल किया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार अब तक करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये की सरकारी जमीनों को बचा चुकी है।

उन्होंने केसीआर और उनके परिवार के सदस्यों पर जमीनों पर कथित कब्जे की कई कोशिशों का भी जिक्र किया। रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों पर कब्जा करने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर करने की कोशिश की गई। उन्होंने रिश्वत के तौर पर लग्जरी कारों और नकदी के लेन-देन का भी आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि के. टी. रामा राव (केटीआर) ने भलेराव परिवार के साथ मिलकर आईएमजी की जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश की थी।

उन्होंने कहा कि बीआरएस नेताओं ने कंचा गाचीबोवली और मामिडिपल्ली में भी कीमती सरकारी जमीनों पर कब्जा करने का प्रयास किया था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने कानूनी लड़ाई लड़कर इन जमीनों को सुरक्षित रखा। रेवंत रेड्डी ने कहा कि केटीआर के सहयोगियों ने गुर्रमगुडा में वन भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमीन के वन क्षेत्र होने की स्थिति को बरकरार रखा।

उन्होंने आरोप लगाया कि केटीआर और रायलसीमा बिल्डर्स ने मंचिरेवुला में 143 एकड़ जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया था। सरकार ने इस जमीन को सुरक्षित रखा और वहां पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए स्कूल स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि जयशंकर भूपालपल्ली जिले में 400 एकड़ वन भूमि एक ऐसे विधायक को सौंप दी गई थी, जो दल बदलकर बीआरएस में शामिल हो गया था। राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी।

रेवंत रेड्डी ने केसीआर और केटीआर को विधानसभा में जमीनों पर कथित कब्जे और अवैध सौदों के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती भी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मियापुर की जमीन को कानूनी लड़ाई के जरिए सुरक्षित रखा गया है और इसका इस्तेमाल सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कैबिनेट के फैसले के बाद मियापुर की जमीन से होने वाली आय शिक्षा क्षेत्र में खर्च की जाएगी। संसाधन जुटाने के लिए गठित कैबिनेट उपसमिति इन प्रस्तावों का अध्ययन करेगी और जनकल्याण तथा विकास के लिए धन के इस्तेमाल पर फैसला लेगी।

--आईएएनएस

डीएससी

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