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‘दो महीने से रिटर्न रुका हुआ है’, गिफ्ट सिटी डेटा फर्म पर गुजरात पुलिस का बयान

गांधीनगर, 7 मई (आईएएनएस)। निवेशकों ने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) से संचालित होने वाली कंपनी 'शूट स्पेस डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड' से जुड़ी एक हाई-रिटर्न निवेश योजना में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
‘दो महीने से रिटर्न रुका हुआ है’, गिफ्ट सिटी डेटा फर्म पर गुजरात पुलिस का बयान

गांधीनगर, 7 मई (आईएएनएस)। निवेशकों ने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) से संचालित होने वाली कंपनी 'शूट स्पेस डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड' से जुड़ी एक हाई-रिटर्न निवेश योजना में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।

अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि मिली शिकायतों के अनुसार कई राज्यों में 33,000 से अधिक लोग इस धोखाधड़ी से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उन्हें वादा किया गया रिटर्न कथित तौर पर मिलना बंद हो गया है।

कई निवेशकों की शिकायतों और पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, कंपनी ने कथित तौर पर एक ऐसी स्कीम का प्रचार किया, जिसमें 'डिजिटल डेटा स्टोरेज स्पेस' (जिसे टेराबाइट्स में मापा जाता है) में निवेश शामिल था, और इस पर लगभग पांच प्रतिशत का तय मासिक रिटर्न देने का वादा किया गया था।

बताया जाता है कि इस मॉडल ने गुजरात, हरियाणा और गोवा के निवेशकों को आकर्षित किया। शुरुआती भुगतान लगभग तीन वर्षों तक नियमित रूप से किए गए, जिससे निवेशकों का इस स्कीम में भरोसा बढ़ा और उन्होंने और ज्यादा निवेश किया।

कई निवेशकों ने दावा किया है कि उन्होंने इसमें बड़ी रकम निवेश की है, जिसमें उनकी जीवन भर की जमा-पूंजी, कर्ज और अपनी संपत्ति बेचकर मिली रकम भी शामिल है।

बताया जाता है कि हर निवेशक का निवेश 5 लाख रुपए से लेकर 3 करोड़ रुपए तक है। कुछ शिकायतकर्ताओं ने अपने आवेदनों में बताया है कि उन्हें अभी भी लगभग 50 लाख से 85 लाख रुपए तक का भुगतान मिलना बाकी है।

यह मामला तब और बढ़ गया जब लगभग दो महीने पहले कथित तौर पर भुगतान बंद हो गए, जिसके बाद कंपनी के अधिकारियों से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया।

इसके चलते बुधवार की शाम को निवेशकों के कई समूह गिफ्ट सिटी स्थित कंपनी के दफ्तर के बाहर जमा हो गए, जिससे वहां तनावपूर्ण माहौल बन गया और स्थिति को काबू में करने के लिए डभोडा पुलिस स्टेशन से पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, लगभग 33,000 निवेशक इस धोखाधड़ी से प्रभावित हो सकते हैं, और इस कथित धोखाधड़ी की कुल रकम 400 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के दफ्तर गिफ्ट सिटी, नोएडा और जम्मू-कश्मीर में थे। कंपनी ने कई सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए थे और उसकी एक कॉर्पोरेट पहचान भी थी, जिससे निवेशकों को लगा कि यह कंपनी भरोसेमंद है।

डभोडा पुलिस इंस्पेक्टर अनिल चौहान ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि इन आरोपों की अभी जांच चल रही है।

उन्होंने कहा, "निवेशकों ने धोखाधड़ी का आरोप लगाया है, और पुलिस तथ्यों की जांच करने के साथ-साथ लोगों के बयान भी दर्ज कर रही है। अब तक लगभग 32 से 33 आवेदन मिल चुके हैं, और सभी शिकायतकर्ताओं को विस्तृत बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जाएगा।"

उन्होंने आगे बताया कि फिलहाल मामले को लेकर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, क्योंकि कुछ निवेशकों का कहना है कि वे अभी भी कंपनी के प्रतिनिधियों के संपर्क में हैं।

उन्होंने बताया, "निवेशकों को तीन वर्षों तक रिटर्न मिलता रहा था। शिकायतें मुख्य रूप से तब सामने आईं जब एक या दो महीने तक भुगतान बंद हो गए। तथ्यों का पता लगाने और यह तय करने के लिए कि कौन जिम्मेदार है, जांच अभी भी जारी है।"

चौहान ने आगे बताया कि कंपनी के मालिक के तौर पर पहचाने गए उत्पल पटेल का घर बंद मिला, और फिलहाल उनका कोई अता-पता नहीं चल पा रहा है।

उन्होंने बताया, "हमें गांधीनगर स्थित उनके घर पर कोई नहीं मिला। पुलिस की टीमें उनकी तलाश कर रही हैं, और उनके मिलते ही उनका बयान दर्ज किया जाएगा।"

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जांच के नतीजों और उसकी जटिलता के आधार पर राज्य की सीआईडी क्राइम भी इसमें शामिल हो सकती है।

जांचकर्ता वित्तीय लेन-देन, निवेशकों के साथ हुए समझौतों और बातचीत के रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह पूरा काम एक व्यवस्थित 'पॉन्जी-टाइप' व्यवस्था के तहत चल रहा था। एक ऐसा पैटर्न जो हाल के महीनों में गुजरात और अन्य जगहों पर रिपोर्ट की गई ज्यादा मुनाफे वाली दूसरी योजनाओं में भी देखने को मिला है।

--आईएएनएस

डीके/डीकेपी

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