बंगाल ने ममता को नकारा, अपनी प्रासंगिकता बनाने के लिए बांग्लादेश भी जा सकती हैं: दिलीप घोष
कोलकाता, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के पंचायत मामलों एवं ग्रामीण विकास मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की जनता द्वारा नकारे जाने के बाद ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए दिल्ली पहुंची हैं।
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष घोष ने तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी अब अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए पड़ोसी देश बांग्लादेश भी जा सकती हैं और वहां किसी आंदोलन में शामिल हो सकती हैं।
मीडिया से बातचीत में घोष ने कहा, “ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को पश्चिम बंगाल की जनता ने पूरी तरह नकार दिया है। राज्य की दो विधानसभा सीटों पर हाल ही में हुए उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दोनों धड़ों का संयुक्त वोट प्रतिशत तीन फीसदी से भी कम रहा। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है। इसलिए वह मीडिया में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए दिल्ली पहुंची हैं। अब उन्हें पड़ोसी देश बांग्लादेश जाकर वहां किसी आंदोलन में शामिल होना चाहिए। हालांकि, इससे भी उनकी पार्टी को कोई फायदा नहीं होगा।”
घोष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन को लेकर भी हमला बोला। ममता बनर्जी इस आंदोलन का समर्थन कर रही हैं।
घोष ने आरोप लगाया, “इस आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग है। राष्ट्रविरोधी ताकतों की साजिश के तहत यह आंदोलन चलाया जा रहा है। देश और उसके लोगों के व्यापक हित में सरकार ने कार्रवाई करके सही कदम उठाया है।”
ममता बनर्जी के सीजेपी आंदोलन में शामिल होने को लेकर टिप्पणी करने वाले घोष पश्चिम बंगाल भाजपा के पहले नेता नहीं हैं।
इससे पहले शनिवार को भाजपा के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने कांग्रेस और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस धड़े का सीधे नाम लिए बिना कहा था कि सीजेपी आंदोलन के जरिए प्रासंगिक बने रहने के लिए एक “आधी मरी” राजनीतिक ताकत ने एक “मृत” राजनीतिक ताकत के साथ हाथ मिला लिया है।
भट्टाचार्य ने महालया के अवसर पर ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री को त्योहार के दौरान राज्य में रहना चाहिए था और विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का दौरा करना चाहिए था। उन्होंने सवाल किया, “आज महालया के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल में रहने के बजाय दिल्ली चली गई हैं। हम चाहते हैं कि वह यहां रहें और विभिन्न पूजा पंडालों का दौरा करें। हम उन्हें ऐसा करते देखना चाहते हैं। तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेता आखिर कहां चले गए हैं?”
--आईएएनएस
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